
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच ऐसी कोई ‘ब्लैंकेट डील’ नहीं हुई है, जिसके तहत इस रणनीतिक जलमार्ग में भारतीय जहाजों को स्वतः सुरक्षा मिल सके। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, और ऐसे में यहां किसी भी तरह का खतरा सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारत जैसे तेल आयातक देशों को प्रभावित कर सकता है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं है, बल्कि बहुपक्षीय संवाद, कूटनीतिक प्रयासों और आवश्यकतानुसार अपनी समुद्री क्षमताओं का इस्तेमाल करता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें वह किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में सीधे पक्ष लेने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। ईरान और अन्य खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध हैं, और ऐसे में भारत किसी एक पक्ष के साथ विशेष समझौते से बचते हुए सभी के साथ संतुलन बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना भी समय-समय पर इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही है, ताकि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जयशंकर के इस बयान से यह भी साफ हो गया है कि भारत फिलहाल किसी औपचारिक या व्यापक सुरक्षा समझौते के बजाय स्थिति के अनुसार लचीली रणनीति अपनाने के पक्ष में है। इससे भारत को बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच अपने विकल्प खुले रखने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर, यह बयान भारत की सतर्क, व्यावहारिक और संतुलित कूटनीति का संकेत देता है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में देश के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित है।



