
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रूट्स में से एक माना जाता है, जिससे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल एशियाई देशों तक पहुंचता है। मौजूदा संकट ने भारत ही नहीं, बल्कि चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी सतर्क कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत और चीन दोनों अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रूट से आने वाले तेल पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकती है।
भू-राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज संकट केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अब वैश्विक आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित करने लगा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और ऊर्जा रणनीति इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।



