
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, लेकिन कई निवेशक इसके ऑटो-रिन्यूअल फीचर के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते। जब FD मैच्योर होती है और निवेशक कोई निर्देश नहीं देता, तो अधिकांश बैंक उसे स्वतः नई अवधि के लिए रिन्यू कर देते हैं। पहली नजर में यह सुविधा फायदेमंद लगती है, लेकिन कई बार यही ऑटो-रिन्यूअल निवेशकों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है।
ऑटो-रिन्यूअल के दौरान FD आमतौर पर मैच्योरिटी की तारीख पर लागू ब्याज दर पर दोबारा निवेश की जाती है। यदि उस समय बैंक की FD दरें पहले की तुलना में कम हों, तो निवेशक को कम रिटर्न मिल सकता है। दूसरी ओर, यदि बाजार में बेहतर निवेश विकल्प उपलब्ध हों, तब भी पैसा स्वतः FD में फंस सकता है और निवेशक अवसर का लाभ नहीं उठा पाता। कई लोग यह भी नहीं जानते कि कुछ बैंक केवल मूलधन (Principal) को रिन्यू करते हैं, जबकि कुछ मूलधन और ब्याज दोनों को नई FD में जोड़ देते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि FD की मैच्योरिटी तिथि पर नजर रखें और ऑटो-रिन्यूअल सेटिंग की समय-समय पर समीक्षा करें। यदि ब्याज दरों में बदलाव हो रहा हो या आपको धन की आवश्यकता हो सकती हो, तो मैच्योरिटी से पहले बैंक से संपर्क कर उचित निर्देश देना बेहतर रहता है। सही योजना के साथ FD सुरक्षित और लाभदायक निवेश साबित हो सकती है, लेकिन ऑटो-रिन्यूअल के नियमों को समझे बिना लिया गया फैसला आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकता है।
FD Auto-Renewal से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:
- मैच्योरिटी पर लागू ब्याज दर पर FD दोबारा रिन्यू होती है।
- ब्याज दर घटने पर रिटर्न कम हो सकता है।
- बैंक के नियमों के अनुसार केवल मूलधन या मूलधन+ब्याज रिन्यू हो सकता है।
- मैच्योरिटी तिथि की निगरानी जरूरी है।
- बेहतर निवेश विकल्पों की तुलना करने के बाद ही ऑटो-रिन्यूअल चुनें।
- वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ नई FD में अलग हो सकता है।
- रिन्यूअल से पहले बैंक की मौजूदा ब्याज दर अवश्य जांचें।



