
उपभोक्ताओं को भ्रामक दावों से बचाने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि ‘100%’ जैसे शब्दों का उपयोग केवल उसी स्थिति में किया जा सकता है, जब दावा पूरी तरह प्रमाणित और सत्यापित हो। उदाहरण के तौर पर ‘100% शुद्ध’, ‘100% सुरक्षित’ या ‘100% गारंटी’ जैसे दावों के लिए कंपनियों को पर्याप्त वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत करना होगा।
CCPA का मानना है कि कई बार कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अतिरंजित या अस्पष्ट दावे करती हैं, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। ऐसे विज्ञापन न केवल उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने कंपनियों को अपने विज्ञापन और प्रचार सामग्री की समीक्षा करने की सलाह दी है।
नए दिशा-निर्देशों के तहत विज्ञापनों में किए गए दावों को स्पष्ट, सत्य और प्रमाणित होना आवश्यक होगा। यदि किसी कंपनी द्वारा बिना पर्याप्त सबूत के भ्रामक दावे किए जाते हैं, तो उसके खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना, विज्ञापन वापस लेने के निर्देश और अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि CCPA की यह पहल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और विज्ञापन जगत में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कंपनियों को अधिक जिम्मेदार तरीके से प्रचार करने के लिए प्रेरणा मिलेगी, जबकि उपभोक्ताओं को उत्पादों और सेवाओं के बारे में सही और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त हो सकेगी।



