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SGPGI की बड़ी उपलब्धि: उत्तर भारत में पहली बार X-ALD पीड़ित बच्चे का हैप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के विशेषज्ञों ने एक्स-लिंक्ड एड्रेनोल्यूकोडिस्ट्रॉफी (X-ALD) से पीड़ित एक बच्चे का हैप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया। इसे उत्तर भारत में अपनी तरह का पहला सफल ट्रांसप्लांट बताया जा रहा है।

X-ALD एक दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों के मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और अधिवृक्क (एड्रिनल) ग्रंथियों को प्रभावित करती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकती है।

हैप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पूर्ण रूप से मेल खाने वाला डोनर उपलब्ध न होने पर आंशिक रूप से मेल खाने वाले, आमतौर पर माता या पिता जैसे करीबी रिश्तेदार, से स्टेम सेल लेकर प्रत्यारोपण किया जाता है। इससे उन मरीजों के इलाज की संभावना बढ़ जाती है जिन्हें उपयुक्त पूर्ण मैच डोनर नहीं मिल पाता।

SGPGI के विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता न केवल संस्थान की उन्नत चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि उत्तर भारत में दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों के इलाज के लिए भी नई उम्मीद लेकर आई है। ऐसे जटिल प्रत्यारोपण के लिए बहु-विषयक विशेषज्ञों की टीम, आधुनिक तकनीक और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियां भविष्य में X-ALD और अन्य जटिल रक्त एवं आनुवंशिक रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए उन्नत उपचार विकल्पों का दायरा और व्यापक बना सकती हैं।

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