यूपी में गोवंश संरक्षण को नई रफ्तार, हरदोई बना नंबर वन

उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 5,000 से अधिक गो-आश्रय स्थलों को गोचर भूमि से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसका उद्देश्य निराश्रित गोवंश के लिए चारे और बेहतर देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
सरकार के मुताबिक, गो-आश्रय स्थलों के पास गोचर भूमि उपलब्ध होने से हरे चारे की व्यवस्था आसान होगी और पशुओं के रखरखाव में सुधार आएगा। इससे आश्रय स्थलों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर चारा उपलब्ध कराने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
इस अभियान में हरदोई ने हरित चारा उत्पादन के मामले में राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। जिले में बड़े पैमाने पर हरे चारे की खेती को बढ़ावा दिया गया है, जिससे गो-आश्रय स्थलों की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि गोवंश संरक्षण के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा देने, किसानों की भागीदारी बढ़ाने और गो-आश्रय स्थलों के बेहतर प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न विभाग मिलकर योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गोचर भूमि का प्रभावी उपयोग, नियमित चारा उत्पादन और आश्रय स्थलों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, तो इससे गोवंश संरक्षण व्यवस्था अधिक टिकाऊ और प्रभावी बन सकती है।



