
देश की प्रमुख स्टील कंपनियों में शामिल टाटा स्टील ने अपने 25 साल पुराने जॉइंट वेंचर को समाप्त करने का फैसला किया है। कंपनी ने जर्मनी की अपनी साझेदार कंपनी के साथ हुए समझौते के तहत उसकी हिस्सेदारी खरीदने की योजना बनाई है।
इस सौदे के बाद टाटा स्टील संबंधित संयुक्त उद्यम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करेगी। इसके लिए कंपनी करीब 335 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी।
टाटा स्टील और जर्मन कंपनी के बीच यह साझेदारी लंबे समय से चल रही थी और इसका उद्देश्य स्टील क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता और कारोबार को आगे बढ़ाना था। अब कंपनी अपनी रणनीति के अनुसार इस कारोबार को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कॉरपोरेट जगत में कंपनियां समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो और साझेदारियों की समीक्षा करती हैं ताकि भविष्य की कारोबारी प्राथमिकताओं के अनुरूप फैसले लिए जा सकें। टाटा स्टील का यह कदम भी इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
निवेशक इस फैसले को कंपनी की भविष्य की योजनाओं और स्टील कारोबार में उसकी दीर्घकालिक रणनीति के नजरिए से देख रहे हैं।



