986 करोड़ के स्पेसपोर्ट का निजीकरण, In-SPACe ने शुरू की प्रक्रिया

भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए In-SPACe ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। संगठन ने तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में बन रहे Small Satellite Launch Complex के संचालन और प्रबंधन को निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 986 करोड़ रुपये है।
यह स्पेसपोर्ट छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण की बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। निजी ऑपरेटर को लॉन्च कैंपेन, रखरखाव, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और मिशन की तैयारी जैसे काम संभालने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। शुरुआत में ISRO की ओर से तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
कुलसेकरपट्टिनम में विकसित किया जा रहा यह लॉन्च कॉम्प्लेक्स भारत के अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के विस्तार का हिस्सा है। इसका उद्देश्य छोटे रॉकेट और सैटेलाइट मिशनों के लिए अतिरिक्त लॉन्च क्षमता तैयार करना है। निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से भारत में कमर्शियल स्पेस गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
इस कदम को भारत की अंतरिक्ष नीति में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। स्पेसपोर्ट के रोजमर्रा के संचालन में निजी कंपनियों की भागीदारी से सरकारी अंतरिक्ष संस्थानों पर संचालन संबंधी दबाव कम हो सकता है और व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं के लिए एक प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार हो सकता है।
In-SPACe की यह पहल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को अधिक व्यावसायिक और निजी निवेश के अनुकूल बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में निजी कंपनियों के लिए लॉन्च सेवाओं, सैटेलाइट निर्माण और अंतरिक्ष आधारित कारोबार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।



