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Pregnancy में Sawan Fast: प्रेग्नेंट महिला ने रखा व्रत तो बिगड़ी तबीयत, डॉक्टर ने बताए 4 खतरे

सावन में धार्मिक आस्था के चलते कई महिलाएं व्रत रखती हैं, लेकिन गर्भावस्था में लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहना हर महिला के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता। जानें डॉक्टर किन संभावित जोखिमों को लेकर सावधान रहने की सलाह देते हैं।

सावन में प्रेग्नेंट महिला ने रखा व्रत, बिगड़ी तबीयत तो डॉक्टर ने चेताया

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और व्रत-उपवास के लिए जाना जाता है। इस दौरान कई महिलाएं धार्मिक आस्था के चलते व्रत रखती हैं। लेकिन अगर महिला प्रेग्नेंट हो तो व्रत रखने से पहले अपनी और बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

हाल ही में एक गर्भवती महिला की व्रत के दौरान तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया, जिसके बाद डॉक्टर ने गर्भावस्था में लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।

दरअसल, प्रेग्नेंसी में शरीर को मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ के लिए भी पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थ की जरूरत होती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक भोजन या पानी छोड़ना उचित नहीं माना जाता।

प्रेग्नेंसी में व्रत रखने से क्या परेशानी हो सकती है?

हर गर्भवती महिला में व्रत का असर अलग हो सकता है। स्वस्थ गर्भावस्था में भी लंबे समय तक भोजन और पानी न लेने से कुछ महिलाओं को कमजोरी या चक्कर जैसी समस्या हो सकती है।

विशेष रूप से ये चार परेशानियां हो सकती हैं:

1. डिहाइड्रेशन का खतरा

अगर व्रत में पानी भी नहीं लिया जा रहा है, तो शरीर में पानी की कमी यानी Dehydration हो सकती है।

गर्भावस्था में डिहाइड्रेशन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उल्टी या दस्त के कारण होने वाली पानी की कमी भी गर्भवती महिला और भ्रूण के लिए समस्या पैदा कर सकती है।

डिहाइड्रेशन के संकेतों में बहुत ज्यादा प्यास, मुंह सूखना, कमजोरी, चक्कर और पेशाब कम होना शामिल हो सकते हैं।

2. ब्लड शुगर कम हो सकती है

लंबे समय तक कुछ न खाने पर कुछ महिलाओं में Blood Sugar कम हो सकती है।

लो ब्लड शुगर के कारण कंपकंपी, पसीना, कमजोरी, भूख, चक्कर या बेचैनी महसूस हो सकती है। ACOG के अनुसार पर्याप्त भोजन न करना या भोजन छोड़ना हाइपोग्लाइसीमिया का कारण बन सकता है, खासकर डायबिटीज वाली गर्भवती महिलाओं में।

अगर महिला को पहले से डायबिटीज है या वह ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवाएं/इंसुलिन ले रही है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के व्रत रखना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

3. जरूरी पोषक तत्वों की कमी

गर्भावस्था में बच्चे की ग्रोथ के लिए पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है।

अगर व्रत के कारण पूरे दिन पर्याप्त पौष्टिक भोजन नहीं मिल पाता, तो महिला का कुल पोषण प्रभावित हो सकता है। ACOG भी गर्भावस्था में संतुलित और स्वस्थ आहार को महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि भ्रूण की ग्रोथ और पोषण मां के भोजन से जुड़े होते हैं।

इसलिए सिर्फ पेट भरने के लिए व्रत खोलने के बजाय पौष्टिक भोजन लेना जरूरी है।

4. कमजोरी, चक्कर और बेहोशी

लंबे समय तक भूखे रहने और पर्याप्त पानी न पीने से कमजोरी, सिर घूमना और चक्कर की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में महिला बेहोश भी हो सकती है।

अगर व्रत के दौरान महिला को बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, भ्रम, बेहोशी या तबीयत तेजी से बिगड़ती महसूस हो, तो इसे केवल व्रत की सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्वास्थ्य खराब होने पर व्रत जारी रखना उचित नहीं है; तत्काल मेडिकल सलाह लेना जरूरी है।

क्या हर प्रेग्नेंट महिला के लिए व्रत खतरनाक है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा।

स्वस्थ गर्भावस्था में धार्मिक उपवास के प्रभावों को लेकर उपलब्ध शोध सीमित हैं और हर महिला की स्थिति अलग होती है। इसलिए यह कहना कि व्रत रखने से हर गर्भवती महिला या बच्चे को नुकसान होगा, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। NHS की pregnancy-fasting guidance भी बताती है कि स्वस्थ गर्भावस्था में fasting के नुकसान के बारे में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

लेकिन इसका दूसरा मतलब यह भी नहीं है कि हर गर्भवती महिला बिना किसी मेडिकल सलाह के लंबे समय तक भूखी-प्यासी रह सकती है।

गर्भावस्था का महीना, महिला का वजन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, एनीमिया, उल्टी की समस्या, बच्चे की ग्रोथ और दूसरी मेडिकल परिस्थितियां—इन सभी को ध्यान में रखना पड़ता है।

किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

खासकर उन गर्भवती महिलाओं को व्रत को लेकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए जिन्हें—

  • डायबिटीज है
  • लो ब्लड प्रेशर या बार-बार चक्कर आते हैं
  • एनीमिया है
  • लगातार उल्टी या मॉर्निंग सिकनेस रहती है
  • डिहाइड्रेशन की समस्या हो चुकी है
  • बच्चे की ग्रोथ को लेकर कोई चिंता है
  • हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी है
  • डॉक्टर ने विशेष डाइट या नियमित भोजन की सलाह दी है

ऐसी परिस्थितियों में व्रत की योजना व्यक्तिगत मेडिकल सलाह के आधार पर ही बननी चाहिए।

व्रत के दौरान तबीयत खराब हो तो क्या करें?

अगर गर्भवती महिला व्रत के दौरान अस्वस्थ महसूस करे तो धार्मिक नियमों से पहले स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।

चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, सांस लेने में परेशानी, तेज दर्द, रक्तस्राव या बच्चे की गतिविधियों में कमी जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। ACOG गर्भावस्था के दौरान गंभीर या असामान्य लक्षणों पर तुरंत हेल्थकेयर प्रोवाइडर से संपर्क करने की सलाह देता है।

अगर डॉक्टर अनुमति दें तो कैसे रखें सावधानी?

अगर आपकी गर्भावस्था सामान्य है और डॉक्टर ने व्रत रखने की अनुमति दी है, तो भी शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।

व्रत के दौरान पानी पीने की अनुमति हो तो पर्याप्त तरल लें। खाने की अनुमति वाले समय में फल, दूध/दही, मेवे, साबुत अनाज, दालें और दूसरे पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें।

व्रत खोलने के बाद बहुत ज्यादा तला-भुना या सिर्फ मीठा खाने के बजाय संतुलित भोजन लेना बेहतर है।

सबसे महत्वपूर्ण बात—व्रत के नियमों को अपनी मेडिकल स्थिति के अनुसार डॉक्टर के साथ पहले से तय करें।

प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे की सेहत सबसे जरूरी

धार्मिक आस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन गर्भावस्था में मां और बच्चे की पोषण एवं हाइड्रेशन संबंधी जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए अगर डॉक्टर व्रत न रखने या व्रत के तरीके में बदलाव की सलाह दें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। गर्भावस्था में किसी भी धार्मिक उपवास का फैसला व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को देखकर होना चाहिए।

निष्कर्ष:
सावन में व्रत रखना धार्मिक आस्था का विषय है, लेकिन प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक भूखे या प्यासे रहना कुछ महिलाओं के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। डिहाइड्रेशन, लो ब्लड शुगर, पोषण की कमी और कमजोरी-चक्कर जैसी समस्याओं का जोखिम हो सकता है, खासकर अगर महिला को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो। इसलिए गर्भावस्था में व्रत रखने से पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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