Tata Steel ने ₹100 में बेची Jamshedpur FC, ISL में कॉरपोरेट क्यों हो रहे बाहर?

Tata Steel ने Jamshedpur FC को महज ₹100 में बेचकर भारतीय फुटबॉल जगत में हलचल मचा दी है। कंपनी ने क्लब की मालिक कंपनी Jamshedpur Football and Sporting Private Limited में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी गोवा के Churchill Brothers Sports Club को ट्रांसफर करने का फैसला किया है। यह सौदा 14 अगस्त को मंजूर हुआ और इसमें क्लब का ISL स्पोर्टिंग लाइसेंस भी शामिल है।
₹100 की कीमत सुनकर यह सौदा चौंकाने वाला जरूर लगता है, लेकिन इसे सामान्य बिजनेस बिक्री की तरह देखना सही नहीं होगा। Tata Steel पहले ही ISL से बाहर निकलने का फैसला कर चुकी थी। कंपनी ने जुलाई में 2026-27 सीजन से हटने का निर्णय लिया था और अब क्लब को दूसरे मालिक को सौंप दिया गया है।
इस डील के तहत Churchill Brothers को Jamshedpur FC का ISL लाइसेंस, 12 खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट और दो कोचों के अनुबंध मिलेंगे। प्रस्तावित ट्रांजैक्शन को AIFF और अन्य जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी है और इसे 31 अगस्त तक पूरा किए जाने की उम्मीद है।
ISL में बड़े कॉरपोरेट घराने क्यों पीछे हट रहे?
Jamshedpur FC का मामला सिर्फ एक क्लब के मालिकाना हक में बदलाव नहीं है, बल्कि ISL के बिजनेस मॉडल पर उठते सवालों को भी सामने लाता है। लीग को हाल के वर्षों में मीडिया राइट्स की घटती वैल्यू, स्पॉन्सरशिप में कमजोरी और व्यावसायिक अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
ISL के नए क्लब-लेड मॉडल में टीमों को अधिक व्यावसायिक जिम्मेदारियां उठानी पड़ रही हैं। इसी दौरान लीग का पुराना कमर्शियल पार्टनरशिप ढांचा भी बदल गया, जिससे क्लबों के लिए भविष्य की लागत और कमाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
Tata Steel ने हालांकि अपने फैसले को केवल वित्तीय नुकसान से जोड़कर पेश नहीं किया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि वह ग्रासरूट और यूथ फुटबॉल पर अपना ध्यान जारी रखेगी। Jamshedpur FC की शुरुआत 2017 में हुई थी और टीम ने 2021-22 में ISL League Winners’ Shield तथा 2025 में घरेलू Super Cup जीता था।
यानी ₹100 में क्लब की बिक्री से ज्यादा अहम सवाल यह है कि भारत में बड़े कॉरपोरेट निवेश के बावजूद प्रोफेशनल फुटबॉल का मॉडल कितना टिकाऊ है। Jamshedpur FC का मामला आने वाले समय में ISL के भविष्य और कॉरपोरेट निवेशकों के भरोसे के लिए एक बड़ा संकेत माना जा सकता है।



