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BRICS से डॉलर का दबदबा खत्म होगा? भारत, चीन और ईरान की रणनीति

BRICS के विस्तार और भारत की 2026 में अध्यक्षता के बीच अमेरिकी डॉलर के वैश्विक वर्चस्व को लेकर बहस तेज हो गई है। समूह के कई देश अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर पर निर्भरता घटाने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि BRICS जल्द ही डॉलर को वैश्विक रिजर्व करेंसी के तौर पर हटा देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रक्रिया फिलहाल धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

भारत की अध्यक्षता में BRICS देशों के भुगतान सिस्टम और केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने पर चर्चा हो रही है। इसका उद्देश्य सीमा-पार भुगतान को आसान और कम खर्चीला बनाना है। RBI गवर्नर ने बताया कि इस दिशा में बातचीत शुरुआती चरण में है, लेकिन इसे 2026 के BRICS एजेंडे में गंभीरता से लिया जा रहा है।

चीन और रूस पहले से ही द्विपक्षीय कारोबार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। चीन का CIPS और रूस का SPFS जैसे वैकल्पिक वित्तीय ढांचे भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद इनकी पहुंच अभी SWIFT जैसी वैश्विक प्रणाली के मुकाबले काफी सीमित है। इसलिए डॉलर से दूरी बनाना संभव तो है, लेकिन पूरी तरह उसका विकल्प तैयार करना बड़ी चुनौती है।

ईरान भी इस रणनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ईरान ने BRICS के साथ आर्थिक और वित्तीय सहयोग गहरा करने तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की इच्छा जताई है। उसके लिए डॉलर से कम निर्भरता का मुद्दा अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, भारत की स्थिति चीन और रूस से अलग है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी अलग BRICS मुद्रा के निर्माण के पक्ष में नहीं है। भारत का जोर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बेहतर भुगतान व्यवस्था पर है, न कि तत्काल डॉलर को हटाने पर।

इसलिए BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती सदस्य देशों के अलग-अलग आर्थिक और रणनीतिक हित हैं। फिलहाल ज्यादा वास्तविक संभावना एक ऐसी बहु-मुद्रा भुगतान व्यवस्था की है, जिसमें डॉलर के साथ-साथ रुपये, युआन, रूबल और अन्य स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़े। इससे अमेरिकी डॉलर की निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन उसका वैश्विक प्रभुत्व तुरंत खत्म होना मुश्किल है।

मुख्य बातें:

  • भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है।
  • BRICS में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • CBDC और फास्ट पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर चर्चा जारी है।
  • ईरान डॉलर से दूरी बनाने के लिए BRICS सहयोग बढ़ा रहा है।
  • भारत अलग BRICS करेंसी का समर्थन नहीं करता।
  • डॉलर का दबदबा कमजोर हो सकता है, लेकिन उसका तत्काल अंत संभव नहीं दिखता।

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