चीन ने विदेशी पर्वतारोहियों के लिए बंद किए एवरेस्ट के रास्ते

चीन ने विदेशी पर्वतारोहियों के लिए तिब्बत की ऊंची चोटियों पर चढ़ाई को लेकर बड़ा फैसला लिया है। माउंट एवरेस्ट के उत्तरी हिस्से समेत चो ओयू और शिशापांगमा जैसी दुनिया की प्रमुख 8000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियों पर विदेशी अभियानों के लिए रास्ते बंद कर दिए गए हैं। इससे कई अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियानों को रद्द करना पड़ा है।
माउंट एवरेस्ट का उत्तरी मार्ग चीन के तिब्बत क्षेत्र में आता है। इस रास्ते से चढ़ाई करने वाले विदेशी पर्वतारोहियों को अब 2026 में अनुमति नहीं मिलने की स्थिति बनी है। इसका सबसे बड़ा असर उन पर्वतारोहियों पर पड़ेगा, जो दुनिया की सभी 14 आठ-हजार मीटर से ऊंची चोटियों को फतह करने का लक्ष्य रखते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, यह फैसला तिब्बत के शिगात्से के पास ऊंचाई वाले क्षेत्र में हुए 52 सेकंड के आतिशबाजी प्रदर्शन के बाद उठे विवाद से भी जुड़ा है। इस घटना को लेकर सार्वजनिक नाराजगी सामने आई थी और विदेशी पर्वतारोहण अभियानों को परमिट जारी करने की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की जांच भी चल रही है।
चीन के इस फैसले से नेपाल स्थित कई पर्वतारोहण कंपनियों पर भी असर पड़ा है। जिन विदेशी पर्वतारोहियों ने तिब्बत की ओर से शरद ऋतु में चढ़ाई की योजना बनाई थी, उनके अभियान रद्द या स्थगित करने पड़े हैं।
इस प्रतिबंध से पर्वतारोहण पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय अभियानों की योजना पर असर पड़ने की संभावना है। खासतौर पर उन पर्वतारोहियों के लिए यह बड़ा झटका है, जिन्होंने 8000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियों की अपनी सूची पूरी करने के लिए चीन के तिब्बती मार्गों पर निर्भरता बनाई थी।
हालांकि, चीन की ओर से स्थानीय पर्वतारोहियों के लिए स्थिति अलग बताई गई है। रिपोर्टों में कहा गया है कि विदेशी पर्वतारोहियों पर रोक के बावजूद चीनी पर्वतारोहियों के अभियान जारी रह सकते हैं।
इस फैसले ने एवरेस्ट और तिब्बत के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण, सुरक्षा, पर्यटन और परमिट व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। आने वाले समय में चीन की ओर से विदेशी पर्वतारोहियों के लिए नए नियम या अनुमति व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।



