
भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क आने वाले महीनों में और तेज होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की SCO और BRICS जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुलाकातें प्रस्तावित हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 24 अगस्त को मॉस्को में पुतिन से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी का संदेश पहुंचाया और कहा कि प्रधानमंत्री SCO शिखर सम्मेलन में पुतिन से मिलने तथा नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
भारत-रूस संबंध केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर है। हालिया बातचीत में आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने तथा व्यापार बढ़ाने के मुद्दे भी प्रमुख रहे।
भारत के लिए रूस के साथ संबंधों का एक बड़ा आधार रणनीतिक स्वायत्तता है। नई दिल्ली अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ अपने हितों के अनुसार साझेदारी बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञ विश्लेषण के मुताबिक SCO, BRICS और अन्य बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भागीदारी भारत को बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने का अवसर देती है।
दूसरी ओर, रूस के लिए भारत एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। ऐसे में मोदी-पुतिन की लगातार होने वाली मुलाकातें सिर्फ औपचारिक कूटनीतिक बैठकें नहीं, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, वैश्विक राजनीति और बहुपक्षीय सहयोग के व्यापक एजेंडे को आगे बढ़ाने का मंच बन सकती हैं। पिछले भारत-रूस शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने राजनीतिक, रणनीतिक, सैन्य, ऊर्जा, परमाणु, अंतरिक्ष और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
आने वाले महीनों में होने वाली इन बैठकों पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। SCO और BRICS दोनों में भारत-रूस सहयोग नई दिल्ली की बहुपक्षीय कूटनीति और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।



