
नेपाल में भोटेकोशी नदी के अचानक उफान से आई भीषण बाढ़ का असर अब भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ा रहा है। नेपाल में तबाही के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन की नजर नारायणी और गंडक नदी के जलस्तर पर बनी हुई है।
भोटेकोशी नदी में अचानक बढ़े जलप्रवाह के बाद नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। इस बाढ़ का असर आगे भारत की ओर बहने वाली नदियों के जलस्तर पर पड़ने की आशंका है। इसी वजह से यूपी के तराई क्षेत्र में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
महाराजगंज और कुशीनगर जैसे नेपाल सीमा से लगे जिलों में विशेष निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को नदी किनारे के क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
नारायणी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कुशीनगर में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने संभावित प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया है। आपदा की स्थिति से निपटने के लिए SDRF को भी तैयार रखा गया है।
वाल्मीकि बैराज और गंडक नदी से जुड़े क्षेत्रों पर भी नजर रखी जा रही है। नेपाल से आने वाले पानी का असर गंडक नदी के प्रवाह पर पड़ सकता है, जिससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार के कुछ इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। अगले 24 से 48 घंटे स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और नदी तथा निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है। किसी भी तरह की आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
नेपाल की बाढ़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नेपाल में फंसे यूपी के नागरिकों की मदद के लिए राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी किया है और संबंधित भारतीय मिशनों से संपर्क किया है।
नेपाल से आने वाली नदियों का पानी हर साल उत्तर प्रदेश और बिहार के तराई क्षेत्रों के लिए चुनौती बनता है। ऐसे में मौजूदा बाढ़ के दौरान समय रहते निगरानी और राहत व्यवस्था सक्रिय करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
कुल मिलाकर, नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद यूपी के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। नारायणी-गंडक के जलस्तर और वाल्मीकि बैराज क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि जलप्रवाह बढ़ने की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित किया जा सके।



