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₹10,000 निवेश से बनाएं ₹5.30 करोड़ का फंड, EPF-NPS का पूरा गणित

अगर आप नौकरी की शुरुआत में ही रिटायरमेंट की प्लानिंग कर लेते हैं, तो हर महीने की छोटी बचत भी भविष्य में करोड़ों रुपये का फंड तैयार कर सकती है। ₹10,000 महीने से निवेश शुरू करने और समय के साथ निवेश राशि बढ़ाने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। EPF और NPS दोनों ही रिटायरमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख विकल्प हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली और रिटर्न का तरीका अलग है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है और 60 साल की उम्र तक निवेश जारी रखता है। शुरुआती निवेश ₹10,000 प्रति माह रखा जाए और हर साल इसमें 5 प्रतिशत की वृद्धि की जाए, तो एक गणना के अनुसार EPF में करीब ₹4.43 करोड़ और NPS में लगभग ₹5.30 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस बन सकता है। ये आंकड़े तय रिटर्न की गारंटी नहीं हैं, बल्कि निर्धारित ब्याज/रिटर्न की धारणाओं पर आधारित अनुमान हैं।

EPF क्या है?

EPF यानी Employees’ Provident Fund नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट बचत का प्रमुख साधन है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से योगदान किया जाता है। EPF का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी अपेक्षाकृत स्थिर ब्याज दर और लंबी अवधि में नियमित बचत है।

मौजूदा गणना में EPF के जरिए ₹10,000 मासिक निवेश से 30 साल की अवधि में लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड बनने का अनुमान लगाया गया है। इसमें हर साल निवेश राशि को 5 प्रतिशत बढ़ाने की धारणा शामिल है।

NPS से कितना बन सकता है पैसा?

NPS यानी National Pension System रिटायरमेंट के लिए सरकार द्वारा विनियमित निवेश व्यवस्था है। इसमें पैसा अलग-अलग एसेट क्लास में लगाया जा सकता है और इसका रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसी वजह से लंबे समय में इसमें EPF की तुलना में अधिक रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी अधिक होता है।

दिए गए अनुमान के मुताबिक, समान निवेश अनुशासन के साथ NPS में 30 साल बाद करीब ₹5.30 करोड़ का कॉर्पस तैयार हो सकता है। यह आंकड़ा अनुमानित रिटर्न पर आधारित है, इसलिए इसे गारंटीड रकम नहीं माना जाना चाहिए।

हर साल 5% निवेश बढ़ाना क्यों जरूरी?

महंगाई के साथ आमदनी बढ़ने पर निवेश की राशि भी बढ़ाना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति पूरी नौकरी के दौरान केवल ₹10,000 प्रति माह ही निवेश करता रहे, तो उसका अंतिम कॉर्पस उतना बड़ा नहीं होगा जितना नियमित रूप से निवेश बढ़ाने पर हो सकता है।

इस उदाहरण में हर साल निवेश में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यानी शुरुआत में ₹10,000 महीने से निवेश शुरू होगा और अगले साल यह राशि ₹10,500 हो जाएगी। इसके बाद हर वर्ष इसी तरह योगदान बढ़ता जाएगा। लंबे समय में बढ़ती निवेश राशि और कंपाउंडिंग मिलकर कॉर्पस को काफी बड़ा कर सकती है।

EPF और NPS में क्या अंतर?

EPF मुख्य रूप से नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए दीर्घकालीन बचत व्यवस्था है, जबकि NPS रिटायरमेंट के लिए बाजार आधारित निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है। EPF में रिटर्न अपेक्षाकृत स्थिर होता है, जबकि NPS में बाजार के प्रदर्शन के अनुसार रिटर्न ऊपर-नीचे हो सकता है।

NPS में रिटायरमेंट के समय निकासी और एन्युटी से जुड़े नियम भी लागू होते हैं। इसलिए केवल अंतिम कॉर्पस देखकर दोनों योजनाओं में से किसी एक को बेहतर कहना सही नहीं होगा। निवेशक को जोखिम, टैक्स लाभ, नौकरी की स्थिति और रिटायरमेंट की जरूरत को ध्यान में रखना चाहिए।

₹5.30 करोड़ का आंकड़ा कैसे समझें?

₹5.30 करोड़ का आंकड़ा देखकर यह समझना जरूरी है कि यह एक अनुमानित रिटायरमेंट कॉर्पस है, न कि सरकार द्वारा मिलने वाली निश्चित रकम। NPS का प्रदर्शन बाजार से जुड़ा है और वास्तविक रिटर्न निवेश विकल्प, एसेट एलोकेशन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसी तरह EPF की ब्याज दर भी समय के साथ बदल सकती है।

इसलिए निवेश की शुरुआत करते समय केवल किसी एक अनुमानित रिटर्न को आधार नहीं बनाना चाहिए। लंबी अवधि में नियमित निवेश, समय-समय पर योगदान बढ़ाना और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार पोर्टफोलियो बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

करोड़पति बनने का फॉर्मूला क्या है?

इस उदाहरण का सबसे बड़ा सबक है कि जल्दी शुरुआत + नियमित निवेश + हर साल निवेश में बढ़ोतरी + लंबी अवधि मिलकर बड़ी संपत्ति तैयार कर सकते हैं। ₹10,000 महीने की शुरुआत छोटी लग सकती है, लेकिन 30 साल का निवेश समय कंपाउंडिंग को काम करने के लिए पर्याप्त अवसर देता है।

अगर कोई व्यक्ति अपनी आय बढ़ने के साथ निवेश की रकम भी बढ़ाता रहे, तो रिटायरमेंट के समय बड़ा कॉर्पस तैयार करने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि निवेश से जुड़े सभी अनुमान बाजार और ब्याज दरों के बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, EPF और NPS दोनों रिटायरमेंट प्लानिंग के उपयोगी विकल्प हैं। दिए गए उदाहरण में ₹10,000 मासिक निवेश को हर साल 5 प्रतिशत बढ़ाने पर 30 साल में EPF के जरिए करीब ₹4.43 करोड़ और NPS के जरिए करीब ₹5.30 करोड़ का अनुमानित फंड बताया गया है। निवेश शुरू करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार योजना चुनना जरूरी है।

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