
नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का एक पल अचानक चर्चा में आ गया। पीएम मोदी ने अपना भाषण कुछ देर के लिए रोक दिया और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर देखते हुए उनका हाल पूछा। इस दौरान उन्होंने पूछा कि क्या सब ठीक है। यह छोटा-सा वाकया कैमरों में कैद हुआ और इसके बाद सोशल मीडिया समेत राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा होने लगी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में शी जिनपिंग की तबीयत या किसी विशेष परेशानी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगा कि प्रधानमंत्री ने किसी स्वास्थ्य संबंधी वजह से अपना संबोधन रोका था। फिलहाल इतना सामने आया है कि पीएम मोदी ने जिनपिंग की ओर देखकर उनका हाल जाना और इसके बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा।
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात केवल इस अप्रत्याशित पल तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी हुई। यह बैठक भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और आपसी अविश्वास के दौर से गुजरे हैं।
द्विपक्षीय बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, कारोबारी संपर्क मजबूत करने और लोगों की आवाजाही को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी विश्वास और सहयोग की जरूरत पर बल दिया। वहीं, शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिये से आगे बढ़ाने की बात कही।
गौरतलब है कि भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद काफी तनाव आया था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए। अक्टूबर 2024 में हुए समझौते के बाद सैन्य गतिरोध वाले कुछ क्षेत्रों से दोनों पक्षों की सेनाओं की वापसी हुई और दिसंबर 2024 तक यह प्रक्रिया पूरी होने की बात सामने आई। हालांकि सीमा से जुड़े कई मुद्दे अब भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।
शी जिनपिंग का भारत दौरा भी इस लिहाज से अहम है। वह करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। BRICS मंच पर दोनों नेताओं की मौजूदगी और उसके बाद हुई द्विपक्षीय बातचीत को भारत-चीन संबंधों में सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक आर्थिक और कारोबारी सहयोग बढ़ने के बावजूद सीमा, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
BRICS समिट में पीएम मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने की भी वकालत की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की जरूरत बताई। साथ ही समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा के लिए BRICS के भीतर एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा।
ऐसे में BRICS मंच पर पीएम मोदी का भाषण रोककर शी जिनपिंग का हाल पूछना भले ही कुछ क्षणों की घटना रही हो, लेकिन दोनों नेताओं की मुलाकात के व्यापक कूटनीतिक संदर्भ ने इसे खास बना दिया है। एक तरफ दोनों देश सहयोग और संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीमा और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद अभी भी चुनौती बने हुए हैं।



