Kanpur Circle Rate: नए सर्किल रेट पर लगी रोक, अक्टूबर के बाद आएंगे प्रस्ताव

कानपुर में जमीन, मकान, दुकान और फ्लैट के नए सर्किल रेट लागू होने की प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है। मुख्यालय से नई गाइडलाइन नहीं मिलने के कारण प्रस्ताव तैयार नहीं हो पा रहे हैं। अब माना जा रहा है कि अक्टूबर के बाद ही नए सर्किल रेट के प्रस्ताव तैयार किए जा सकेंगे।
दरअसल, कानपुर में नए सर्किल रेट तय करने की कवायद जून-जुलाई से चल रही है। प्रदेश स्तर पर निर्धारित प्रारूप के आधार पर मानकीकृत मूल्यांकन सूची तैयार की जानी है। इसी सूची के आधार पर जमीन और संपत्तियों के सर्किल रेट निर्धारित किए जाएंगे।
नई व्यवस्था में सड़क की चौड़ाई को भी सर्किल रेट तय करने का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना है। तीन, छह, नौ, 12, 15 और 18 मीटर तथा उससे अधिक चौड़ी सड़कों के आधार पर दरों का निर्धारण किया जाएगा। वहीं चिह्नित यानी सेगमेंट रोड पर एक समान सर्किल रेट रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
फिलहाल अलग-अलग क्षेत्रों और सड़कों पर सर्किल रेट में काफी अंतर है। नए मानकीकृत प्रारूप को लागू करने में कई तकनीकी और प्रक्रियागत पेच सामने आए हैं। इसी वजह से सब-रजिस्ट्रारों को प्रस्ताव तैयार करने में दिक्कत हो रही है और मुख्यालय स्तर पर गाइडलाइन को दोबारा तैयार किया जा रहा है।
सर्किल रेट किसी क्षेत्र में जमीन या संपत्ति के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्य का आधार होता है। इसी के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क और पंजीकरण से जुड़े शुल्क की गणना की जाती है। इसलिए नए सर्किल रेट बढ़ने पर कई क्षेत्रों में जमीन-मकान की रजिस्ट्री का खर्च भी बढ़ सकता है।
कानपुर में पिछले वर्ष सितंबर से नए सर्किल रेट लागू हुए थे। सामान्य तौर पर हर साल नई सर्किल रेट सूची लागू करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि दरों में बदलाव हमेशा एक समान नहीं होता; कुछ संपत्तियों की दर बढ़ सकती है, जबकि कुछ मामलों में राहत भी मिल सकती है।
अब मुख्यालय से संशोधित गाइडलाइन आने के बाद सब-रजिस्ट्रार नए प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसके बाद प्रस्तावित दरों पर लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही नए सर्किल रेट को अंतिम रूप देकर लागू किया जा सकेगा।
ऐसे में फिलहाल कानपुर के लोगों को जमीन और मकान के नए सर्किल रेट के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। अक्टूबर के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। नए प्रस्ताव सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में जमीन और संपत्ति की सरकारी दर कितनी बढ़ती या घटती है।



