हामिद अंसारी के बयान पर किरेन रिजिजू का पलटवार, जानें विवाद
नई दिल्ली में आयोजित एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में हामिद अंसारी ने दिवंगत लेखक और कानूनविद एजी नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का संदर्भ दिया। उन्होंने किताब की प्रस्तावना में दर्ज जवाहरलाल नेहरू की एक पुरानी टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें नेहरू के हवाले से हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के लिए खतरे के रूप में बताया गया था।
अंसारी ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में ऐसी प्रवृत्तियां सामने आई हैं, जो नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित अवधारणा को चुनौती देती हैं और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ओर बदलाव का संकेत देती हैं। उन्होंने अपने भाषण में राष्ट्रवाद, पहचान और सांप्रदायिक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर बात की।
अंसारी की टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग कट्टरपंथियों, धार्मिक उन्मादियों, चरमपंथियों और अलगाववादियों के बारे में एक शब्द नहीं बोलेंगे। यह बयान रिजिजू की ओर से अंसारी की टिप्पणी के जवाब में दिया गया।
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी अंसारी के बयान की आलोचना की और इसे कांग्रेस की राजनीति से जोड़कर आरोप लगाए। हालांकि, ये बीजेपी की राजनीतिक टिप्पणियां और आरोप हैं, जिन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद का केंद्र अंसारी का अपना कोई अलग ऐतिहासिक दावा नहीं, बल्कि उनके भाषण में नूरानी की किताब के जरिए नेहरू की पुरानी टिप्पणी का संदर्भ और उसके बाद बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया है।



