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खाद पर QR Code सिस्टम की तैयारी, मध्य प्रदेश में ₹764 करोड़ की सब्सिडी बची

केंद्र सरकार खाद सब्सिडी पर बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने और खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए नई डिजिटल प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत किसानों को उनकी जमीन और बोई गई फसल के आधार पर खाद का कोटा दिया जा सकता है। खाद की बुकिंग मोबाइल ऐप से होगी और खरीदारी के समय QR कोड तथा आधार आधारित सत्यापन का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सब्सिडी वाली खाद के दुरुपयोग, कालाबाजारी और गैर-कृषि इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

कैसे काम करेगी QR कोड से खाद लेने की व्यवस्था?

प्रस्तावित फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) के तहत खाद खरीदने की प्रक्रिया को किसान के डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इसके लिए AgriStack में दर्ज जमीन और फसल की जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा।

नई व्यवस्था में प्रक्रिया इस तरह हो सकती है:

  1. किसान या उसका अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल ऐप पर रजिस्ट्रेशन करेगा।

  2. जमीन और फसल से संबंधित जानकारी के आधार पर खाद की जरूरत दर्ज की जाएगी।

  3. खाद की अग्रिम बुकिंग के बाद QR कोड वाला टोकन जारी होगा।

  4. निर्धारित खाद विक्रेता के यहां QR कोड स्कैन किया जाएगा।

  5. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद खाद दी जाएगी।

यह सिस्टम मौजूदा Integrated Fertilizer Management System (iFMS) और PoS मशीनों के नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। हालांकि, इसे देशभर में लागू करने के लिए राज्यों का सहयोग और चरणबद्ध क्रियान्वयन जरूरी होगा।

मध्य प्रदेश में कैसे बची ₹764 करोड़ की सब्सिडी?

मध्य प्रदेश में ई-विकास (e-Vikas) पहल के तहत खाद वितरण को किसानों की जमीन और फसल के रिकॉर्ड से जोड़ा गया। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, खरीफ 2026 में खाद की खपत पिछले साल के 36 लाख टन से घटकर 32 लाख टन रह गई। इस कमी के साथ केंद्र सरकार की खाद सब्सिडी में ₹764 करोड़ की बचत दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था राज्य के 55 जिलों में लागू की गई और लगभग 50 लाख किसानों को इसके दायरे में शामिल किया गया। खाद का आवंटन जमीन, फसल और मौसमी जरूरत के आधार पर किया जाता है।

हालांकि, खाद की बिक्री घटने को केवल सब्सिडी बचत की सफलता के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि वास्तविक जरूरत वाले किसानों को बुवाई और फसल के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में पर्याप्त खाद समय पर मिलती रहे।

222 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट, बिक्री में 28% गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ 2026 के दौरान 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 222 जिलों में नई बिक्री व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया गया। इस दौरान खाद की बिक्री में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सरकार का मानना है कि किसान की जमीन और फसल के आधार पर खाद की जरूरत तय करने से जरूरत से ज्यादा खरीदारी और सब्सिडी वाली खाद के दूसरे इस्तेमाल पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, डिजिटल रिकॉर्ड से वितरण और बिक्री पर निगरानी रखना भी आसान होगा।

खाद सब्सिडी पर क्यों बढ़ रहा है सरकारी खर्च?

खाद सब्सिडी केंद्र सरकार के बजट पर बड़ा खर्च है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में खाद सब्सिडी पर खर्च बढ़कर ₹2.17 लाख करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 22.6 प्रतिशत अधिक था।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खाद सब्सिडी के लिए ₹1.71 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यूरिया, DAP और घरेलू यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली LNG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से सरकार के खर्च पर दबाव पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति में व्यवधान भी इस चुनौती को बढ़ा सकते हैं।

पांच साल में खाद की बिक्री 15.6% बढ़ी

खाद की बिक्री में भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में कुल खाद बिक्री 579.67 लाख मीट्रिक टन थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 670.33 लाख मीट्रिक टन हो गई। यानी पांच वर्षों में बिक्री में लगभग 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

खाद की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के कारण सब्सिडी खर्च को नियंत्रित करना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए जरूरत के मुताबिक वितरण, बेहतर निगरानी और संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

किसानों को क्या होगा फायदा और किन बातों पर ध्यान जरूरी?

नई व्यवस्था से खाद की अग्रिम बुकिंग, उपलब्ध स्टॉक की जानकारी और वितरण में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। इससे दुकानों पर भीड़ और अनावश्यक खरीदारी कम हो सकती है।

लेकिन इसके साथ कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। जमीन या फसल के रिकॉर्ड में गलती, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और आधार सत्यापन में दिक्कत होने पर किसानों को परेशानी हो सकती है। इसलिए ऐसी व्यवस्था में रिकॉर्ड सुधारने, तकनीकी सहायता देने और वास्तविक जरूरत के अनुसार अतिरिक्त खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।

निष्कर्ष: केंद्र सरकार खाद वितरण को डिजिटल और जरूरत आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मध्य प्रदेश में ₹764 करोड़ की सब्सिडी बचत का दावा इस मॉडल के संभावित लाभ दिखाता है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात से भी तय होगी कि सब्सिडी का दुरुपयोग रोकने के साथ किसानों को उनकी फसल के लिए समय पर पर्याप्त खाद मिलती रहे।

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