Air India-Vistara Merger: 1 साल में क्यों घट गया TATA की एयर इंडिया का क्रेज?

TATA Group की दो बड़ी एयरलाइंस — Air India और Vistara — के मर्जर की कहानी भारतीय एविएशन सेक्टर की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रही है। जब टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया को सरकारी नियंत्रण से बाहर निकालकर अपने अधीन लिया और फिर उसे विस्तारा के साथ मिलाने की घोषणा की, तब उम्मीद की जा रही थी कि भारत को एक विश्वस्तरीय प्रीमियम एयरलाइन मिलेगी जो विदेशी ब्रांड्स को चुनौती दे सके। लेकिन मर्जर के एक साल बाद तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है।
आधिकारिक डेटा के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में एयर इंडिया का यात्रियों के बीच क्रेज और भरोसा दोनों घटा है। जहां पहले यात्री इसे नए युग की ‘इंडियन इंटरनेशनल एयरलाइन’ के रूप में देख रहे थे, वहीं अब कई यात्रियों ने शिकायत की है कि मर्जर के बाद सेवाओं में गिरावट, कस्टमर सपोर्ट में देरी और उड़ानों की समयबद्धता में कमी देखने को मिली है। खास बात यह है कि मर्जर के बाद एयर इंडिया के पास विशाल नेटवर्क और संसाधन तो आ गए, लेकिन दोनों एयरलाइनों की प्रबंधन शैली और संचालन संस्कृति में तालमेल बैठाने में काफी मुश्किलें आईं।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि विस्तारा अपने उत्कृष्ट इन-फ्लाइट अनुभव और समय की पाबंदी के लिए जानी जाती थी, जबकि एयर इंडिया अभी भी अपने संक्रमण काल से गुजर रही है। इन दोनों ब्रांड्स के एकीकरण में कर्मचारियों की नीतियों, ब्रांड पहचान और प्रबंधन ढांचे को मिलाना एक चुनौती बन गया है। नतीजतन, यात्रियों को एकसमान अनुभव नहीं मिल पा रहा है, जिससे एयर इंडिया की छवि प्रभावित हुई है।
हालांकि टाटा ग्रुप का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है। कंपनी का कहना है कि आने वाले महीनों में एक एकीकृत ब्रांड पहचान, नई यूनिफॉर्म, और बेहतर टेक्नोलॉजी आधारित कस्टमर सर्विस के जरिए एयर इंडिया को फिर से प्रीमियम स्तर पर लाया जाएगा।



