सरकार का बड़ा फैसला संभव: चीनी कंपनियों की सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में वापसी की तैयारी

भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर एक बार फिर मंथन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में चीनी कंपनियों को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के लिए बोली लगाने की अनुमति दे सकती है। वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा तनाव के बाद देश में कई चीनी कंपनियों को सरकारी परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर से बाहर कर दिया गया था। उस समय यह फैसला सुरक्षा कारणों और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के उद्देश्य से लिया गया था। हालांकि, मौजूदा समय में भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, स्मार्ट सिटी मिशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की जरूरतों को देखते हुए सरकार नीतिगत बदलाव पर विचार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रतिबंधों में आंशिक ढील दी जाती है, तो इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और परियोजनाओं की लागत कम हो सकती है। चीनी कंपनियां तकनीक, मशीनरी और बड़े स्तर पर उत्पादन में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जानी जाती हैं, जिसका लाभ भारत को मिल सकता है। हालांकि, सरकार इस बात को लेकर सतर्क है कि किसी भी तरह का समझौता देश की सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के साथ न हो। इसलिए संभावना है कि अनुमति मिलने की स्थिति में भी कड़े नियम और शर्तें लागू की जाएंगी, जैसे सुरक्षा क्लियरेंस, स्थानीय साझेदारी और डेटा स्टोरेज से जुड़े प्रावधान।
वहीं, घरेलू उद्योग जगत में इस संभावित फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ उद्योग संगठन इसे निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार का रुख फिलहाल संतुलित नजर आ रहा है, जहां वह एक ओर ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को प्राथमिकता देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक व्यावहारिकता को भी नजरअंदाज नहीं कर सकती। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है, जो भारत-चीन व्यापारिक संबंधों और देश की आर्थिक नीति के लिहाज से अहम साबित होगा।



