चीन ने रोक लगाई उर्वरक पर, भारत ने सऊदी से 5 साल में DAP की आपूर्ति पक्की की
हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने विशेष उर्वरक (specialty fertilizers) की निर्यात प्रक्रिया में सरकारी निरीक्षण रोक दिया है, जिससे सब्जी, फल और अनाज की पैदावार पर असर होने लगा। यह कदम न तो कोई आधिकारिक प्रतिबंध था और न ही बयान, बल्कि चीन की ओर से एक नरम ट्रेड ब्लॉक की तरह काम कर रहा है, जिससे भारतीय किसानों को भारी संकट का सामना करना पड़ा। भारत पर चीन का निर्भरता लगभग 80% तक थी, और यह अचानक ठहराव किसानों की नींद उड़ा देने वाला था ।
इसके जवाब में भारत ने ठान लिया कि देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की फसल सुरक्षा के लिए सऊदी अरब से DAP (Diammonium Phosphate) उर्वरक की पांच वर्षीय सप्लाई अनुबंध किया जाए। इस रणनीतिक समझौते के तहत सऊदी खान कंपनी Ma’aden ने भारत की IPL, KRIBHCO और CIL जैसी कंपनियों को प्रति वर्ष 3.1 मिलियन मीट्रिक टन DAP देने का वादा किया है, जो वित्त वर्ष 2025–26 से शुरू होकर अगले पांच वर्षों तक चलेगा, साथ ही पांच साल और बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है ।
यह कदम चीन की नीति बदलने के तुरंत बाद ही लिया गया, जिससे भारत किसान सहयोग और कृषि उत्पादन में स्थिरता ला सके। विशेषज्ञ कहते हैं कि चीन ने DAP नियंत्रण बढ़ाकर भारत में फसल उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने सऊदी समझौते से न केवल नुकसान से बचाव किया, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीति भी बनाई ।
मुख्य बातें संक्षेप में:
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🇨🇳 चीन ने भारत को सप्लाई होने वाले विशेष उर्वरकों पर प्रोसीजरल ब्लॉक लगा दिया
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🤝 भारत ने सऊदी अरब से 5 साल के लिए DAP सप्लाई समझौता किया (3.1 मिलियन टन वार्षिक)
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⏳ अनुबंध में 5 साल और विस्तार का विकल्प भी शामिल
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🚜 किसानों को मिलेगा खरीफ–रबी सीजन में DAP की सुनिश्चित आपूर्ति
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🌐 यह कदम भारत की खाद्य व कृषि सुरक्षा को मज़बूत करने वाला माना जा रहा है
📌 निष्कर्ष:
चीन की साजिश जैसी नीति ने भारतीय कृषि श्रृंखला को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने सऊदी अरब से लंबे अनुबंध कर इसे टाला। अब अगले पांच वर्षों तक DAP की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है, जिससे किसान एवं देशकाणिक खाद्य सुरक्षा की चिंता से मुक्त हो सकते हैं। यह सिर्फ एक व्यापारिक कदम नहीं, बल्कि भू‑राजनीतिक बुद्धिमत्ता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।



