Critical Mineral Imports: भारत की 5 अहम मिनरल्स, 100% इंपोर्ट पर निर्भरता

भारत की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों के लिए कुछ ऐसे क्रिटिकल मिनरल बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिनकी आपूर्ति पर देश पूरी तरह या आंशिक रूप से निर्भर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए ये मिनरल उतने ही जरूरी हैं जितना तेल और गैस। लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से कई संसाधनों के लिए भारत को 100% तक आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे प्रमुख मिनरल्स की आपूर्ति में देश की बाहरी निर्भरता सबसे अधिक है। इनका उपयोग बैटरी निर्माण, स्टोरेज सिस्टम और हाई-टेक इंडस्ट्री में होता है। वैश्विक स्तर पर इन संसाधनों पर कुछ बड़े देशों का दबदबा है, खासकर चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका की नीतियों और व्यापारिक रुख का सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ने समय रहते घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार अब क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और रीसाइक्लिंग पर जोर दे रही है ताकि आयात निर्भरता को कम किया जा सके।



