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नामी बैंकर का बयान: ‘ब्रह्मा-महेश सिद्धांत’ पर जोर


एक नामी बैंकर ने विकास और आर्थिक नीति को लेकर दिए गए अपने बयान में एक अलग तरह की वैचारिक व्याख्या पेश की है। उन्होंने कहा कि केवल “विष्णु” जैसे एकल संतुलन दृष्टिकोण से आगे बढ़कर “ब्रह्मा और महेश” जैसे बहुआयामी सिद्धांतों की भी जरूरत है, ताकि अर्थव्यवस्था तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के साथ कदम मिला सके।
उनका तर्क है कि आधुनिक आर्थिक व्यवस्था को केवल संरक्षण या संतुलन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसमें सृजन, परिवर्तन और नवाचार जैसे पहलुओं को भी समान रूप से शामिल करना होगा। इसी बहु-आयामी सोच को वे विकास का भविष्य मानते हैं।
इस बयान ने आर्थिक और अकादमिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। कुछ विशेषज्ञ इसे रूपकात्मक दृष्टिकोण मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे आर्थिक नीति में अधिक समग्र सोच की आवश्यकता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।