FMCG Growth: सितंबर तिमाही में बिक्री की रफ्तार धीमी, बड़ी कंपनियों को फायदा

देश के फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर के लिए सितंबर तिमाही के आंकड़े मिले-जुले रहे हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान FMCG सेक्टर की बिक्री वॉल्यूम ग्रोथ घटकर 3.6 फीसदी रह गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 4.7 फीसदी थी। हालांकि, बड़ी लिस्टेड कंपनियों ने इस दौरान बेहतर प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, बढ़ती लागत, सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों और कमजोर मांग के कारण छोटी और क्षेत्रीय कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर
सितंबर तिमाही में हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने 7 फीसदी की अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की। वहीं, मैरिको के भारतीय कारोबार में 10 फीसदी की वृद्धि हुई। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की वॉल्यूम ग्रोथ 8 फीसदी रही, जबकि नेस्ले इंडिया ने डबल डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की। इससे पता चलता है कि बड़े ब्रांड मौजूदा चुनौतियों के बीच भी अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में सफल रहे हैं।
छोटी कंपनियों के सामने बढ़ीं चुनौतियां
छोटी और क्षेत्रीय FMCG कंपनियों को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता और सप्लाई चेन में रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी कंपनियों के पास मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और खरीदारी की बेहतर क्षमता है, जिससे वे लागत के दबाव को संभाल पा रही हैं। इसके मुकाबले छोटी कंपनियों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी करना और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीण मांग में भी आई सुस्ती
आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर तिमाही में ग्रामीण FMCG वॉल्यूम ग्रोथ 3.6 फीसदी रही, जबकि शहरी बाजार में यह 3.5 फीसदी थी। हालांकि, दोनों क्षेत्रों की वृद्धि पिछले साल के मुकाबले धीमी हुई है। खाने-पीने के सामान, पर्सनल केयर और होम केयर जैसे प्रमुख सेगमेंट में भी बिक्री की रफ्तार प्रभावित हुई है।
FMCG सेक्टर के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लागत को नियंत्रित करने के साथ ग्राहकों की मांग बनाए रखने की है। आने वाले समय में महंगाई, ग्रामीण आय और उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता इस सेक्टर की ग्रोथ तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।



