FPI Exodus 2025: भारतीय बाजार छोड़कर किन देशों में जा रहा विदेशी निवेश?

साल 2025 में भारतीय शेयर बाजार ने जहां घरेलू निवेशकों के दम पर मजबूती दिखाई, वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली ने सभी का ध्यान खींचा। आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशक अब तक करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये भारतीय शेयर बाजार से निकाल चुके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और डॉलर की मजबूती मानी जा रही है। जब अमेरिका जैसे विकसित देशों में सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिलने लगते हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर वहां का रुख करते हैं।
भारतीय बाजार से निकली यह पूंजी मुख्य रूप से अमेरिका, जापान और कुछ यूरोपीय देशों के शेयर और बॉन्ड बाजारों में जा रही है। इसके अलावा चीन और वियतनाम जैसे एशियाई देशों में भी सीमित स्तर पर निवेश बढ़ा है, जहां वैल्यूएशन आकर्षक नजर आ रहे हैं। अमेरिका में टेक्नोलॉजी शेयरों की मजबूती और सरकारी बॉन्ड पर बढ़ा रिटर्न विदेशी निवेशकों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प दे रहा है। वहीं भारत में ऊंचे वैल्यूएशन, रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क किया है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निकासी स्थायी नहीं है। भारत की आर्थिक ग्रोथ, मजबूत घरेलू मांग और लंबी अवधि की विकास संभावनाएं अब भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं। जैसे ही वैश्विक ब्याज दरों में नरमी आएगी और अनिश्चितता कम होगी, विदेशी पूंजी की वापसी संभव है। तब तक घरेलू निवेशक और SIP के जरिए आ रहा पैसा बाजार को संतुलन देने का काम करता रहेगा, जिससे भारतीय शेयर बाजार की बुनियाद मजबूत बनी रहेगी।



