आतंकवाद से कालेधन तक हवाला कारोबार: कटे नोट, कोड और ‘धुरंधर’ में दिखे क्राइम की सजा

हवाला कारोबार को लंबे समय से कालेधन, आतंकवाद की फंडिंग, ड्रग्स और अवैध हथियारों की सप्लाई से जोड़ा जाता रहा है और हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर’ में दिखाया गया यह नेटवर्क लोगों के लिए फिर चर्चा का विषय बन गया है। हवाला मूल रूप से एक गैरकानूनी समानांतर वित्तीय व्यवस्था है, जिसमें बिना बैंकिंग चैनल के पैसा एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। इसमें न तो कोई लिखित रिकॉर्ड होता है और न ही औपचारिक लेन-देन, बल्कि भरोसे, कोड वर्ड, कटे नोट, खास नंबरों और एजेंटों की श्रृंखला पर पूरा सिस्टम चलता है। कटे नोटों का इस्तेमाल पहचान के तौर पर किया जाता है—एक आधा नोट देने वाला और दूसरा आधा नोट पाने वाला, ताकि सही व्यक्ति की पुष्टि हो सके। इसी तरह कोड भाषा और संकेतों से रकम, जगह और समय तय किया जाता है। धुरंधर जैसी फिल्मों में यह दिखाया गया है कि कैसे यह नेटवर्क दिखने में साधारण व्यापार या ट्रांसफर जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन छिपे होते हैं। भारत में हवाला कारोबार गैरकानूनी है और इस पर कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में मुख्य रूप से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA), विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और भारतीय न्याय संहिता/आईपीसी की धाराएं लग सकती हैं। यदि हवाला से जुड़े पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में पाया जाता है, तो UAPA के तहत आरोपी को लंबी कैद, यहां तक कि आजीवन कारावास तक हो सकता है। PMLA के तहत दोष सिद्ध होने पर 7 से 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, साथ ही अवैध संपत्ति जब्त होती है। FEMA के उल्लंघन पर आर्थिक दंड और जेल दोनों का प्रावधान है। जांच एजेंसियां जैसे ED, NIA और IB ऐसे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए डिजिटल ट्रेल, कॉल डिटेल, कोड ब्रेकिंग और संपत्ति जब्ती का सहारा लेती हैं। फिल्मों में भले ही हवाला तंत्र बेहद शातिर और रोमांचक लगे, लेकिन हकीकत में यह देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए कानून ऐसे अपराधों के प्रति सख्त है और सरकार की नीति स्पष्ट है कि हवाला, कालेधन और आतंक फंडिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रखा जाएगा।



