IndiGo को सरकार की अंतिम चेतावनी: 7 दिसंबर तक रिफंड और डिलीवरी क्लियर नहीं हुई तो होगी कड़ी कार्रवाई

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) एक बार फिर यात्रियों की शिकायतों को लेकर सरकार के निशाने पर आ गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन को आखिरी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि 7 दिसंबर तक सभी लंबित रिफंड मामलों और यात्रियों का सामान उनके घर तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, अन्यथा कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय के इस रुख से साफ है कि अब यात्रियों की परेशानियों को हल्के में लेने की किसी भी एयरलाइन को इजाजत नहीं दी जाएगी।
दरअसल, पिछले कुछ समय से इंडिगो के खिलाफ फ्लाइट कैंसिलेशन, देरी, रिफंड में महीनों लगने और चेक-इन सामान न मिलने जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। सोशल मीडिया से लेकर उपभोक्ता मंचों तक यात्रियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। कई मामलों में यात्रियों को न तो समय पर पैसा लौटा और न ही उनका बैगेज सही पते पर भेजा गया, जिससे उनकी यात्रा और निजी जीवन दोनों प्रभावित हुए।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए इंडिगो के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द या प्रभावित हुई हैं, उन्हें तय समयसीमा में पूरा रिफंड मिले, वहीं जिनका सामान एयरपोर्ट या किसी अन्य स्थान पर अटका है, उसे बिना अतिरिक्त शुल्क सीधे यात्रियों के घर तक पहुंचाया जाए। सरकार ने यह भी कहा कि यात्रियों से संवाद की कमी सबसे बड़ी समस्या है, जिसे तुरंत सुधारना होगा।
मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिसंबर की समयसीमा के बाद भी शिकायतें बनी रहीं, तो इंडिगो पर भारी जुर्माना, फ्लाइट शेड्यूल में कटौती या अन्य नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम सिर्फ इंडिगो ही नहीं, बल्कि बाकी एयरलाइन्स के लिए भी एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि यात्री अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा।
इंडिगो की ओर से आश्वासन दिया गया है कि कंपनी सभी लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए अतिरिक्त टीम और संसाधन लगा रही है। अब देखना होगा कि तय तारीख तक इंडिगो सरकार की इस ‘लास्ट वॉर्निंग’ पर कितना खरा उतरती है, क्योंकि इस बार चूक की गुंजाइश बेहद कम है।



