IDBI बैंक विनिवेश: सरकार-LIC की हिस्सेदारी और कोटक का बिड़ का बड़ा दांव

IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर केन्द्र सरकार की तैयारी तेज हो गई है और अब खबर है कि इसे खरीदने की दौड़ में कोटक महिंद्रा बैंक सबसे आगे माना जा रहा है। लंबे समय से चर्चा में चल रहे IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया अब अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। सरकार चाहती है कि बैंक को एक सक्षम निजी संस्थान के हाथ में सौंपा जाए, जिससे इसकी वित्तीय हालत और संचालन क्षमता को मजबूती मिल सके। इस प्रक्रिया में कई निजी और विदेशी बैंक रुचि दिखा चुके हैं, लेकिन कोटक महिंद्रा बैंक ने सबसे मजबूत रुचि और क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिससे इसकी दावेदारी सबसे अधिक मानी जा रही है।
IDBI बैंक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी फिलहाल LIC और भारत सरकार के पास है। LIC के पास बैंक की लगभग 49% हिस्सेदारी है, जबकि केन्द्र सरकार के पास लगभग 45% हिस्सेदारी मौजूद है। दोनों मिलकर लगभग 94% शेयर होल्ड करते हैं। निजीकरण योजना के तहत सरकार और LIC दोनों अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा बेचने की तैयारी में हैं। इस कदम से बैंक में एक नए निजी प्रबंधन को लाया जा सकेगा, जिससे बैंक की सेवाओं और संचालन में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि बैंक का निजीकरण बैंकिंग सेक्टर को और मजबूत बनाने तथा प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
कोटक महिंद्रा बैंक की ओर से IDBI को खरीदने में रुचि का मुख्य कारण इसकी बड़ी शाखा संख्या और मजबूत रिटेल बैंकिंग नेटवर्क है। IDBI के अधिग्रहण से कोटक महिंद्रा की मार्केट पहुंच कई गुना बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील पूरी हो जाती है तो भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। IDBI के पास देशभर में फैला हुआ व्यापक ब्रांच नेटवर्क है, जो किसी भी खरीदार के लिए बेहद मूल्यवान संपत्ति है।



