
भारत की आर्थिक रफ्तार आने वाले वर्षों में भी मजबूत बनी रह सकती है। विभिन्न वैश्विक और घरेलू संस्थानों की हालिया आकलन रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहने की संभावना है। मजबूत घरेलू खपत, बुनियादी ढांचा निवेश और विनिर्माण क्षेत्र में सुधार इसके प्रमुख आधार माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को युवा आबादी, तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम और सरकारी पूंजीगत व्यय का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, सप्लाई चेन विविधीकरण और विदेशी निवेश भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे सकते हैं।
दूसरी ओर, चीन की अर्थव्यवस्था को रियल एस्टेट क्षेत्र की चुनौतियों, जनसंख्या संबंधी दबावों और कमजोर घरेलू मांग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विकास दर के मामले में भारत और चीन के बीच अंतर और बढ़ सकता है। हालांकि चीन का आर्थिक आकार अभी भी भारत से काफी बड़ा है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उछाल या बड़े वित्तीय झटके नहीं आते हैं, तो भारत FY27 में लगभग 6% से 7% या उससे अधिक की विकास दर बनाए रख सकता है। इससे भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बाजार बना रहेगा और दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
हालांकि महंगाई, वैश्विक मांग में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जोखिम जैसे कारकों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। फिर भी मौजूदा अनुमानों के आधार पर भारत की विकास कहानी आने वाले वर्षों में भी मजबूत दिखाई दे रही है।



