
बंधुआ मजदूरी के मुद्दे पर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को लेकर भारत ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है। भारत का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए हैं, जिनके आधार पर भारतीय उत्पादों या व्यापार व्यवस्था पर इस तरह का शुल्क लगाया जाए।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े नियमों और उनके अनुपालन को लेकर कई देशों की जांच शुरू की थी। इसके तहत कुछ देशों से आने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। भारत ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि केवल व्यापक आरोपों के आधार पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। नई दिल्ली का तर्क है कि USTR यह स्पष्ट नहीं कर सका कि भारत की नीतियां किस तरह अमेरिकी बाजार या वहां की कंपनियों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
भारत ने कहा है कि वह किसी भी वास्तविक चिंता को दूर करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए तथ्य और प्रमाण आवश्यक हैं। भारत के अनुसार, जांच में देश की श्रम व्यवस्था और कानूनों का पर्याप्त विश्लेषण नहीं किया गया।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शुल्क का असर भारतीय निर्यातकों और दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है। भारत का कहना है कि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए देश में कानून मौजूद हैं और किसी भी व्यापारिक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है। वहीं, अमेरिका का रुख है कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में जबरन श्रम जैसी प्रथाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने जरूरी हैं।
(नोट: यह मामला अभी प्रस्ताव और समीक्षा प्रक्रिया के चरण में है, अंतिम शुल्क लागू होने का निर्णय अलग प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।)



