क्या अमेरिका के दबाव में बदल रही UPI नीति? GTRI ने सरकार को दी चेतावनी

भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। थिंक टैंक GTRI (Global Trade Research Initiative) ने सरकार को चेतावनी दी है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते UPI से जुड़ी नीतियों में ऐसे बदलाव नहीं किए जाने चाहिए, जो देश के डिजिटल भुगतान ढांचे को प्रभावित करें।
GTRI का कहना है कि UPI भारत की एक महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) बन चुका है और इसकी सफलता का आधार कम लागत, आसान पहुंच और व्यापक उपयोग है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वैश्विक कंपनियां भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में नीति निर्माण करते समय भारत को अपने घरेलू डिजिटल इकोसिस्टम और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
UPI का संचालन भारत में National Payments Corporation of India के माध्यम से होता है और यह दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल भुगतान नेटवर्क में शामिल हो चुका है।
GTRI ने यह भी कहा कि भारत को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए, लेकिन रणनीतिक महत्व वाले प्लेटफॉर्म की नीतियों में बदलाव सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बन चुका है। ऐसे में इसकी नीतियों को लेकर सरकार, उद्योग और विशेषज्ञों के बीच चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।



