
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार की चर्चित कंपनी ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कभी 157 रुपये के आसपास रिकॉर्ड स्तर छूने वाला भाव अब फिसलकर करीब 29 रुपये तक आ गया है, यानी ऊपरी स्तर से लगभग 80 प्रतिशत की बड़ी टूट। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। सबसे पहले, कंपनी के घाटे और मुनाफे की राह पर साफ टाइमलाइन न दिखने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ी है, पारंपरिक ऑटो कंपनियां और नए स्टार्टअप आक्रामक कीमतों पर बेहतर सर्विस नेटवर्क के साथ मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना चुनौती बन गया है।
दूसरी बड़ी वजह सप्लाई चेन, डिलीवरी और आफ्टर-सेल्स सर्विस से जुड़ी शिकायतें रही हैं। जब किसी ग्रोथ स्टोरी वाली कंपनी से उम्मीदें बहुत ऊंची होती हैं, तब छोटी नकारात्मक खबर भी शेयर पर ज्यादा दबाव डालती है। कई ब्रोकरेज हाउस ने भी निकट अवधि में लाभप्रदता को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है, जिससे बिकवाली का माहौल बना। हाल के तिमाहियों में खर्च बढ़ने, मार्केटिंग और नेटवर्क विस्तार पर भारी निवेश ने बैलेंस शीट पर दबाव डाला है। निवेशकों को डर है कि यदि फंडिंग या कैश फ्लो का समर्थन मजबूत नहीं रहा तो कंपनी को आगे पूंजी जुटानी पड़ सकती है, जिससे हिस्सेदारी कमजोर हो सकती है।
बाजार जानकार यह भी मानते हैं कि लिस्टिंग के बाद जो ऊंचे वैल्यूएशन मिले थे, वे भविष्य की संभावनाओं पर आधारित थे। जैसे-जैसे ग्राउंड पर प्रदर्शन की परीक्षा हुई, कीमतों में वास्तविकता का समायोजन दिखने लगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशक कंपनी की तकनीक, ब्रांड पहचान और ईवी सेक्टर की संभावनाओं को देखते हुए गिरावट को अवसर के रूप में भी देख सकते हैं, लेकिन जोखिम से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल ट्रेंड कमजोर है और भरोसा लौटने के लिए कंपनी को बिक्री, सर्विस क्वालिटी और मुनाफे की दिशा में ठोस सुधार दिखाना होगा। जब तक यह स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक शेयर में उतार-चढ़ाव और दबाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।



