Old Tax Regime फिर पड़ेगी भारी! ड्राफ्ट नियमों के बाद किन लोगों को मिलेगी राहत

नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि सरकार न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाकर धीरे-धीरे ओल्ड रिजीम को पीछे छोड़ देगी, लेकिन ताजा चर्चाओं ने तस्वीर को थोड़ा बदल दिया है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो एक बार फिर ओल्ड टैक्स रिजीम खास वर्ग के करदाताओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
ओल्ड रिजीम की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से डिडक्शन और छूट रही है। धारा 80C, 80D, होम लोन के ब्याज पर छूट, HRA, LTA जैसे कई प्रावधान सैलरीड क्लास को टैक्स बचाने का मौका देते हैं। जिन लोगों ने पीएफ, पीपीएफ, एलआईसी, बच्चों की ट्यूशन फीस या होम लोन में बड़ा निवेश किया है, उनके लिए यह व्यवस्था आज भी राहत का जरिया बन सकती है। ड्राफ्ट नियमों के बाद यह चर्चा इसलिए बढ़ी है क्योंकि न्यू रिजीम में भले ही टैक्स स्लैब सरल हैं, लेकिन छूट कम होने से कई मध्यम आय वर्ग के लोग ज्यादा टैक्स दे सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन करदाताओं की सैलरी स्ट्रक्चर में अलाउंस ज्यादा हैं या जो टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में नियमित निवेश करते हैं, उन्हें ओल्ड रिजीम का गणित फिर से समझना चाहिए। कई मामलों में देखा गया है कि सही प्लानिंग से ओल्ड रिजीम चुनने पर टैक्स देनदारी न्यू रिजीम से कम हो सकती है। यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार अब कर्मचारियों को दोनों विकल्पों की तुलना करके फैसला लेने की सलाह दे रहे हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि हर किसी के लिए ओल्ड रिजीम फायदेमंद नहीं होगी। जिन लोगों के पास क्लेम करने के लिए ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए न्यू रिजीम अभी भी आसान और बेहतर विकल्प रह सकती है। इसलिए अंतिम निर्णय व्यक्ति की आय, निवेश और खर्च की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
आने वाले समय में जब नियमों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, तब यह तय होगा कि किसे कितना लाभ मिलेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को लेकर चर्चा ने एक बार फिर करदाताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, और लोग अपने टैक्स प्लान की दोबारा समीक्षा करने लगे हैं।



