
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता में देश की तय “रेड लाइन” को पार नहीं किया है और किसानों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की प्राथमिकता हमेशा अपने अन्नदाताओं की सुरक्षा, उनकी आय में वृद्धि और घरेलू कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना रही है। गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई देश अपने उत्पादों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच चाहते हैं, लेकिन सरकार हर प्रस्ताव का मूल्यांकन इस आधार पर करती है कि उससे भारत के किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार मुक्त व्यापार के खिलाफ नहीं है, बल्कि निष्पक्ष और संतुलित व्यापार की पक्षधर है, जिसमें भारतीय उत्पादों को भी समान अवसर मिलें। मंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि विदेशी दबाव में आकर सरकार कृषि क्षेत्र में रियायतें दे सकती है। गोयल ने कहा कि ऐसी आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं और किसानों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार किसी भी ऐसी शर्त को स्वीकार नहीं करेगी जिससे किसानों की आजीविका या न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़े।
पीयूष गोयल ने आगे कहा कि पिछले वर्षों में सरकार ने कृषि निर्यात बढ़ाने, नई मंडियों तक पहुंच बनाने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि किसान सिर्फ घरेलू बाजार पर निर्भर न रहें, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बेहतर दाम पा सकें। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आत्मनिर्भर भारत का विजन तभी सफल होगा जब किसान मजबूत होंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दोहराया कि सरकार हर कदम सोच-समझकर उठा रही है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके इस बयान को कृषि संगठनों और नीति विशेषज्ञों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भी भारत व्यापार समझौतों में अपने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने की नीति पर कायम रहेगा।



