Piyush Goyal on GDP: 7.8% ग्रोथ पर सवाल उठाने वालों को दिया जवाब, राजन-गर्ग पर साधा निशाना

भारत की GDP ग्रोथ को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गई है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि के आंकड़े जारी होने के बाद पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए थे। अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इन आलोचनाओं पर कड़ा जवाब दिया है।
दिल्ली में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गोयल ने कहा कि टीवी पर कुछ विपक्षी नेताओं और पूर्व अधिकारियों को GDP आंकड़ों पर सवाल उठाते देखा जा रहा है। उन्होंने बिना नाम लिए एक पूर्व वित्त सचिव और पूर्व RBI गवर्नर का भी जिक्र किया।
गोयल ने आरोप लगाया कि आलोचक GDP की पुरानी सीरीज और नई सीरीज की तुलना कर रहे हैं, जबकि दोनों के बीच आधार वर्ष में बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों की तुलना ‘एक ही आधार’ पर की जानी चाहिए और पुराने डेटा को नए डेटा से मिलाकर निष्कर्ष निकालना सही तरीका नहीं है।
मंत्री ने GDP के आधिकारिक आंकड़ों का बचाव करते हुए कहा कि सरकार के मंत्री इन आंकड़ों को ‘बनाते’ नहीं हैं। उनके मुताबिक, आंकड़े निर्धारित सांख्यिकीय प्रक्रिया के तहत तैयार होते हैं और इनकी विश्वसनीयता पर अनावश्यक संदेह पैदा नहीं किया जाना चाहिए।
पीयूष गोयल ने आलोचकों की मानसिकता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति लगातार नकारात्मक सोच रखता है और लोगों को हतोत्साहित करने की कोशिश करता है, तो इससे वह खुद को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने GDP ग्रोथ को लेकर देश में सकारात्मक माहौल बनाए रखने पर जोर दिया।
गोयल ने रोजगार को लेकर उठ रहे सवालों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह पूछ रहे हैं कि इतनी तेज GDP ग्रोथ के बावजूद नौकरियां कहां हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने आलोचकों को ‘jobless’ कहकर तंज कसा और कहा कि कुछ लोग टीवी पैनल पर आकर तर्क गढ़ने को ही अपना काम बना चुके हैं।
दरअसल, पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है तो पर्याप्त संख्या में अच्छी नौकरियां क्यों नहीं बन रही हैं। उन्होंने निवेश की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई थी।
पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने भी GDP के आंकड़ों को लेकर अलग तरह की चिंता जाहिर की। उनका तर्क था कि नई GDP सीरीज में पिछले साल के मौजूदा कीमतों वाले आंकड़े में संशोधन हुआ है, इसलिए सिर्फ headline growth rate देखकर पूरी तस्वीर समझना पर्याप्त नहीं होगा।
दूसरी ओर, सरकार ने GDP के 7.8 प्रतिशत आंकड़े को सही बताया है। सांख्यिकी मंत्रालय ने भी आलोचनाओं के बीच स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि GDP का अनुमान स्थापित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य सांख्यिकीय प्रक्रियाओं के तहत तैयार किया गया है।
अप्रैल-जून तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर ने भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखा है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों के बीच यह बहस जारी है कि GDP की तेज रफ्तार का असर रोजगार, निजी निवेश और आम लोगों की आय पर किस हद तक दिखाई दे रहा है।
इस पूरे विवाद में एक तरफ आधिकारिक GDP आंकड़ों की विश्वसनीयता का सवाल है, तो दूसरी तरफ आर्थिक वृद्धि की गुणवत्ता और रोजगार सृजन का मुद्दा है। सरकार आंकड़ों को लेकर आश्वस्त है, जबकि आलोचक यह देखना चाहते हैं कि तेज विकास का लाभ अर्थव्यवस्था के व्यापक हिस्से तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।
कुल मिलाकर, 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ को लेकर रघुराम राजन और सुभाष गर्ग की चिंताओं के बाद पीयूष गोयल का बयान बहस को और तेज कर सकता है। सरकार जहां आंकड़ों को मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का प्रमाण बता रही है, वहीं आलोचक रोजगार और निवेश जैसे जमीनी संकेतकों के आधार पर ग्रोथ की तस्वीर को परखने की मांग कर रहे हैं।



