डॉलर के मुकाबले रुपये ने बनाया नया रिकॉर्ड लो, जानें Trade Deal रुकने का पूरा असर

India-US Trade Deal में चल रही अनिश्चितताओं और बातचीत में आई रुकावट का सीधा असर भारतीय मुद्रा बाज़ार पर दिखाई दिया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय माहौल में बढ़ती अस्थिरता और अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते में प्रगति न होने के कारण रुपये पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है। सोमवार सुबह ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत से ही भारतीय रुपये में कमजोरी देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले फिसलते हुए रिकॉर्ड 90.56 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह पहली बार है जब रुपये ने इतना बड़ा गिरावट स्तर दर्ज किया है, जिसने निवेशकों, बाज़ार विशेषज्ञों और सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील में कृषि उत्पादों, तकनीकी एक्सेस, टैरिफ रियायतों और ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसे कई मुद्दों पर बातचीत अटकी हुई है। दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़ने से यह समझौता आगे नहीं बढ़ पा रहा है। विदेशी निवेशकों को लग रहा है कि लम्बे समय तक यह अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिसके चलते उन्होंने भारतीय बाज़ार से पूंजी निकालना शुरू कर दिया है। FII (Foreign Institutional Investors) की इस लगातार बिकवाली का सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से भी रुपये पर दबाव और बढ़ गया।
रुपये की गिरावट का असर आम लोगों पर भी देखने को मिल सकता है। आयातित सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चा तेल और विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों की फीस महंगी हो सकती है। एयरलाइन सेक्टर, ऑयल कंपनियों और उन उद्योगों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा जो अपने कच्चे माल के लिए विदेशों पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत-US Trade Deal जल्द आगे नहीं बढ़ती और वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती जारी रहती है, तो रुपये पर और भी दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि सरकार और रिजर्व बैंक स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और बाज़ार को स्थिर रखने के लिए संभावित हस्तक्षेप भी कर सकते हैं। RBI के पास फॉरेक्स रिज़र्व पर्याप्त हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरी होने पर रुपये को सपोर्ट देने के लिए किया जा सकता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि रुपये की यह गिरावट अस्थायी साबित हो सकती है, बशर्ते कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत में सकारात्मक प्रगति दिखाई दे।
कुल मिलाकर, India-US Trade Deal में रुकावट ने भारतीय रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर तक धकेल दिया है और निकट भविष्य में बाज़ार की दिशा काफी हद तक इसी डील के नतीजों पर निर्भर करेगी।



