Reliance Industries पर SC सख्त, NTPC केस में ₹10 लाख का जुर्माना

Reliance Industries को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने NTPC से जुड़े करीब 20 साल पुराने प्राकृतिक गैस आपूर्ति विवाद में कंपनी की अपील खारिज करते हुए उस पर ₹10 लाख की लागत लगाई है। यह मामला 2005 में दायर हुआ था और अब तक मुकदमा साक्ष्य के चरण से आगे नहीं बढ़ पाया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई की। अदालत ने Reliance की ओर से बार-बार आपत्तियां और अलग-अलग स्तरों पर कानूनी चुनौती दिए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया के कारण मुकदमे की प्रगति लगातार बाधित हुई।
यह विवाद प्राकृतिक गैस की आपूर्ति से जुड़े एक पुराने करार का है। NTPC ने 2005 में Reliance Industries के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इसके बाद मामले में दस्तावेजों, सबूतों और प्रक्रियात्मक मुद्दों को लेकर कई दौर की कानूनी कार्यवाही हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में हर चरण पर किसी न किसी तरह की आपत्ति सामने आती रही और निचली अदालत के आदेशों के बाद मामला अपीलीय और विशेष अनुमति क्षेत्राधिकार तक पहुंचता रहा। अदालत ने इस तरह की लंबी कानूनी प्रक्रिया को मुकदमे की धीमी प्रगति का अहम कारण माना।
ताजा मामले में Reliance ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गवाह के हलफनामे में मौजूद कुछ आंतरिक और विशेषाधिकार प्राप्त संचार को हटाने यानी redact करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस चुनौती को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि 2005 में शुरू हुआ यह मुकदमा दो दशक बाद भी साक्ष्य के चरण में है। इसी देरी को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने ₹10 लाख की लागत लगाने का आदेश दिया। यह रकम सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
कुल मिलाकर, यह फैसला लंबे समय तक चलने वाले कॉरपोरेट मुकदमों में अनावश्यक देरी और बार-बार की प्रक्रियात्मक चुनौतियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को दिखाता है।



