TATA vs Reliance: किस ग्रुप के पास हैं ज्यादा कंपनियां? जानें किसका कारोबार कितने सेक्टर में फैला

भारत के दो सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों—Tata Group और Reliance Industries Limited—के बीच तुलना हमेशा चर्चा का विषय रहती है। दोनों ही समूह देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन इनके बिजनेस मॉडल, सेक्टर विस्तार और कंपनियों की संख्या में बड़ा अंतर है। टाटा ग्रुप की स्थापना 1868 में Jamsetji Tata ने की थी और आज यह समूह 100 से अधिक ऑपरेटिंग कंपनियों के साथ 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करता है। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टाटा पावर, टाटा केमिकल्स, टाइटन और एयर इंडिया जैसे ब्रांड इसके अंतर्गत आते हैं। टाटा ग्रुप का कारोबार आईटी, ऑटोमोबाइल, स्टील, पावर, केमिकल्स, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन समेत करीब 10 से अधिक प्रमुख सेक्टरों में फैला है।
वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की स्थापना 1966 में Dhirubhai Ambani ने की थी, जिसे आज Mukesh Ambani लीड कर रहे हैं। रिलायंस के पास दर्जनों सब्सिडियरी और सहयोगी कंपनियां हैं, जिनमें रिलायंस जियो, रिलायंस रिटेल और रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स प्रमुख हैं। कंपनी का मुख्य फोकस पेट्रोकेमिकल्स, रिफाइनिंग, तेल और गैस, टेलीकॉम, रिटेल और ग्रीन एनर्जी जैसे लगभग 6–7 बड़े सेक्टरों पर है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से रिलायंस भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शुमार है और इसका रेवेन्यू भी देश में शीर्ष पर रहता है।
अगर कंपनियों की संख्या की बात करें तो टाटा ग्रुप रिलायंस से आगे दिखाई देता है, क्योंकि इसके अंतर्गत 100 से अधिक कंपनियां काम करती हैं, जबकि रिलायंस की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कंपनियों की संख्या इससे कम है। हालांकि, राजस्व और मार्केट वैल्यू के मामले में रिलायंस कई बार टाटा ग्रुप की कुल वैल्यू से भी आगे निकल जाती है। टाटा का बिजनेस ज्यादा विविध और ऐतिहासिक रूप से विस्तृत है, जबकि रिलायंस ने पिछले दो दशकों में तेज विस्तार कर टेक्नोलॉजी और रिटेल सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाई है।



