ट्रंप के फैसले से भारत पर असर: मुकेश अंबानी की रिलायंस को झटका, रूस से तेल आयात पर संकट

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीतिगत घोषणा का असर अब भारत तक पहुंच गया है। ट्रंप के इस एक्शन से भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को बड़ा झटका लग सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर ट्रंप प्रशासन रूस पर तेल आयात को लेकर सख्त कदम उठाता है, तो मुकेश अंबानी की कंपनी को अपने रूसी तेल आयात को रोकना पड़ सकता है। इससे रिलायंस के रिफाइनिंग कारोबार पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
रूस, भारत के लिए पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल का प्रमुख सप्लायर बन गया है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाया था, तब भारत ने सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदा था। इसी रणनीति से देश की रिफाइनरियों, विशेषकर रिलायंस जैसी कंपनियों को काफी मुनाफा हुआ था। लेकिन ट्रंप की नई विदेश नीति में रूस पर सख्ती की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत की ऊर्जा नीति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाता है, तो भारत को अपने ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं। ऐसे में सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से आयात बढ़ाने की संभावना है, लेकिन इससे लागत भी बढ़ जाएगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का जामनगर रिफाइनरी प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब है और यहां आयातित तेल की प्रोसेसिंग होती है। रूसी तेल सस्ता होने के कारण कंपनी को निर्यात में अधिक लाभ हो रहा था। अगर यह आपूर्ति रुकती है, तो कंपनी की लागत और मुनाफे दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।
हालांकि भारत सरकार फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही फैसला लेगा। वहीं ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के कदम से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और इसका असर भारत जैसे विकासशील देशों पर ज्यादा पड़ेगा।
कुल मिलाकर, ट्रंप की सख्त नीति से रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं और भारत को अपनी ऊर्जा नीति में नई रणनीति अपनानी पड़ सकती है।



