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ITR रिफंड कब मिलेगा? स्टेटस चेक से लेकर देरी और फेल होने की वजहें जानें

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि रिफंड कब आएगा और अगर देरी हो रही है तो कारण क्या हैं। हर साल लाखों टैक्सपेयर्स को रिफंड का इंतजार रहता है, लेकिन कई बार छोटी-सी गलती या प्रक्रिया अधूरी होने की वजह से रिफंड अटक जाता है या फेल हो जाता है। ऐसे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

आमतौर पर ITR वेरिफिकेशन पूरा होने के 20 से 45 दिनों के भीतर रिफंड प्रोसेस कर दिया जाता है। अगर आपने समय पर रिटर्न फाइल किया है और ई-वेरिफिकेशन सही तरीके से हो गया है तो रिफंड सीधे आपके बैंक अकाउंट में आता है। रिफंड की स्थिति जानने के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “Refund Status” या “e-Filing Dashboard” से स्टेटस चेक किया जा सकता है।

रिफंड में देरी के कई कारण हो सकते हैं। इनमें बैंक अकाउंट का गलत IFSC कोड, अकाउंट प्री-वैलिडेट न होना, पैन और आधार लिंक न होना, या ITR में दी गई जानकारी का TDS डेटा से मैच न करना शामिल है। इसके अलावा अगर आपका केस स्क्रूटनी या प्रोसेसिंग के लिए चुना गया है, तो भी रिफंड आने में समय लग सकता है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि रिफंड फेल क्यों हो जाता है? इसका सबसे सामान्य कारण बैंक डिटेल्स की गड़बड़ी होती है। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर दोबारा सही बैंक डिटेल्स अपडेट करनी होती हैं और “Refund Re-issue” का विकल्प चुनना पड़ता है।

अगर रिफंड अमाउंट कम आ गया है या बिल्कुल नहीं आया है, तो आप इंटिमेशन नोटिस (धारा 143(1)) जरूर चेक करें। इससे पता चलता है कि रिटर्न और विभाग के रिकॉर्ड में कहां अंतर है। जरूरत पड़ने पर रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट भी डाली जा सकती है।

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