दूसरे महीने बढ़ी थोक महंगाई, सब्जी-दाल के दाम आसमान पर; आम जनता की बढ़ी चिंता

महंगाई के मोर्चे पर आम जनता के लिए एक बार फिर बुरी खबर सामने आई है। दिसंबर महीने में लगातार दूसरे महीने थोक मुद्रास्फीति (WPI Inflation) में इजाफा दर्ज किया गया है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता दिख रहा है, खासकर रसोई से जुड़ी जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़ने के कारण घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। थोक स्तर पर कीमतों में आई इस बढ़ोतरी ने संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में खुदरा महंगाई भी दबाव में रह सकती है।
दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज उछाल मानी जा रही है। सब्जियों, दालों, अनाज और खाने के तेल जैसे जरूरी सामान महंगे हुए हैं। प्याज, आलू और टमाटर जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम कई इलाकों में सामान्य से काफी ऊपर चल रहे हैं। इसके अलावा दालों और तिलहनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब तबके पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम की मार, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और परिवहन लागत में वृद्धि ने भी महंगाई को हवा दी है। कुछ राज्यों में बेमौसम बारिश और खराब मौसम के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा, जिसका असर सीधे सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ा। वहीं ईंधन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से थोक कीमतें और ऊपर चली गईं।
लगातार दूसरे महीने थोक मुद्रास्फीति के बढ़ने से नीति निर्माताओं की चिंता भी बढ़ गई है। यदि यह रुझान जारी रहता है तो इसका असर खुदरा बाजार पर और गहराने की आशंका है। इससे रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी दबाव बन सकता है, क्योंकि महंगाई नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
आम उपभोक्ताओं के लिए स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पहले से ही वे महंगे ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चों से जूझ रहे हैं। रसोई के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी से मासिक खर्च संतुलन बिगड़ रहा है। फिलहाल उम्मीद यही की जा रही है कि आने वाले महीनों में आपूर्ति सुधरने और सरकारी हस्तक्षेप से कीमतों में कुछ राहत मिले, ताकि आम जनता को महंगाई की इस मार से थोड़ी राहत मिल सके।



