चीनी की कमी और बढ़ती कीमतों से दुनिया चिंतित, भारत की सप्लाई पर टिकी वैश्विक बाजार की नजर

चीनी की कमी और बढ़ती कीमतों ने भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की भी चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल भारत की उत्पादन स्थिति और निर्यात नीति पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और कारोबारियों की नजर बनी हुई है।
भारत में चीनी उत्पादन को लेकर चिंता की बड़ी वजह गन्ने की पैदावार, मौसम की अनिश्चितता और घरेलू मांग के बीच संतुलन है। रिपोर्टों के अनुसार, उत्पादन में दबाव के कारण लगातार दूसरे साल घरेलू खपत और उत्पादन के बीच अंतर को लेकर चिंता जताई जा रही है।
चीनी की कीमतों में तेजी का असर सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहता। चीनी एक वैश्विक कमोडिटी है, इसलिए बड़े निर्यातक देशों की उपलब्धता में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। भारत की निर्यात नीति में बदलाव को वैश्विक खरीदार करीब से देखते हैं।
भारत सरकार का फोकस घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने पर रहा है। चीनी आपूर्ति को लेकर किसी भी बड़े फैसले का असर मिलों, किसानों, उपभोक्ताओं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में मानसून, गन्ने की पैदावार, एथेनॉल नीति और वैश्विक मांग जैसे कारक चीनी बाजार की दिशा तय करेंगे। भारत की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश वैश्विक चीनी आपूर्ति व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाता है।



