Year Ender 2025: 20 साल में शेयर बाजार, सोना और चांदी में किसने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न?

पिछले 20 सालों में भारतीय निवेशकों के लिए शेयर बाजार, सोना और चांदी तीनों ही बड़े निवेश विकल्प रहे हैं। 2005 से 2025 तक का सफर देखें तो इन तीनों एसेट क्लास ने अलग-अलग समय पर निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। हालांकि, अगर लंबी अवधि की बात करें तो शेयर बाजार ने सबसे ज्यादा “छप्परफाड़” कमाई कराई है। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स 20 साल में कई गुना बढ़े हैं। जहां 2005 के आसपास सेंसेक्स करीब 7–8 हजार के स्तर पर था, वहीं 2025 के अंत तक यह ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। इस दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड और मजबूत कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वालों को 12–15% से ज्यादा का सालाना कंपाउंड रिटर्न मिला, जिसने लॉन्ग टर्म में दौलत बनाने का काम किया।
वहीं, सोने ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया। 2005 में सोना लगभग 7,000–8,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो 2025 तक कई गुना बढ़कर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया। आर्थिक संकट, महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सोना हमेशा से “सेफ हेवन” माना गया है। इस 20 साल की अवधि में सोने ने औसतन 9–10% सालाना रिटर्न दिया, जो जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए बेहतरीन साबित हुआ।
चांदी की बात करें तो इसने ज्यादा उतार-चढ़ाव जरूर दिखाया, लेकिन कुछ वर्षों में निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा भी दिया। 2005 में चांदी करीब 10–12 हजार रुपये प्रति किलो थी, जो 2025 तक कई गुना बढ़ी। इंडस्ट्रियल डिमांड, ग्रीन एनर्जी और सोलर सेक्टर में बढ़ते उपयोग के कारण चांदी में तेजी देखने को मिली। हालांकि, इसका रिटर्न सोने और शेयरों की तुलना में ज्यादा अस्थिर रहा।
अब सवाल है 2026 में कीमतें कितनी हो सकती हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में शेयर बाजार की दिशा भारत की आर्थिक ग्रोथ, ब्याज दरों और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगी। लंबी अवधि में इक्विटी से बेहतर रिटर्न की उम्मीद बनी हुई है। सोने की कीमतें महंगाई और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण मजबूत रह सकती हैं, जबकि चांदी को इंडस्ट्रियल डिमांड से सपोर्ट मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर, 20 साल का अनुभव यही सिखाता है कि संतुलित पोर्टफोलियो—जिसमें शेयर, सोना और चांदी तीनों शामिल हों—निवेशकों के लिए सबसे समझदारी भरा विकल्प साबित होता है।



