33 साल पुराना ‘दिल हूं हूं करे’ गीत कैसे बना, जानें खास कहानी

भारतीय सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं जो रिलीज के दशकों बाद भी अपनी ताजगी और भावनात्मक असर बनाए रखते हैं। ‘दिल हूं हूं करे’ भी ऐसा ही गीत है, जिसकी धुन और लता मंगेशकर की आवाज ने इसे यादगार बना दिया।
यह गाना फिल्म रुदाली का हिस्सा था, जिसमें डिंपल कपाड़िया ने शनिचरी का मुख्य किरदार निभाया था। फिल्म का निर्देशन कल्पना लाजमी ने किया था, जबकि इसकी कहानी और संवाद से जुड़े काम में गुलजार की अहम भूमिका थी।
‘दिल हूं हूं करे’ की खासियत यह है कि इसकी संगीत जड़ें असम की लोक-संगीत परंपरा से जुड़ी हैं। भूपेन हजारिका ने इस धुन को पहले असमिया फिल्म मनिराम देवान के लिए इस्तेमाल किया था।
असमिया मूल रचना ‘बुकु हम हम कोरे’ में दिल की धड़कन और बेचैनी को व्यक्त करने वाला भाव था। बाद में इसी संगीत भाव को हिंदी गीत के लिए नए रूप में पेश किया गया।
गीत के हिंदी बोल गुलजार ने लिखे थे। दिलचस्प बात यह है कि ‘हम हम’ जैसे असमिया शब्दों के भाव को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया, जिससे गीत की मूल सांस्कृतिक खुशबू पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी। उनकी गायकी ने गीत के भीतर छिपी बेचैनी, प्रेम और भावनात्मक संवेदना को बेहद प्रभावशाली तरीके से सामने रखा। लता मंगेशकर और भूपेन हजारिका की यह संगीत साझेदारी गीत की बड़ी ताकत बनी।
रुदाली का संगीत एल्बम भी अपने दौर में काफी चर्चित हुआ था। फिल्म में भूपेन हजारिका का संगीत इसकी कहानी और राजस्थान की पृष्ठभूमि के साथ एक अलग सांस्कृतिक रंग जोड़ता है।
आज भी ‘दिल हूं हूं करे’ को सुनने पर इसकी धुन में भारतीय लोक-संगीत की गहराई महसूस होती है। असम की संगीत परंपरा, भूपेन हजारिका का संगीत, गुलजार के बोल और लता मंगेशकर की आवाज—इन सबके मेल ने इस गीत को 33 साल बाद भी यादगार बनाए रखा है।



