Piyush Pandey: नहीं रहा विज्ञापन जगत का चमकता सितारा, ‘अबकी बार मोदी सरकार’ नारे से बनाई थी पहचान

भारतीय विज्ञापन जगत के महानायक और क्रिएटिविटी के प्रतीक पियूष पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने अपने अनोखे आइडियाज और यादगार अभियानों से भारतीय विज्ञापन की दिशा और दशा बदल दी थी। पियूष पांडे का नाम सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में विज्ञापन की दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। वे लंबे समय तक Ogilvy India के चेयरमैन रहे और उनके नेतृत्व में कंपनी ने देश-विदेश में कई पुरस्कार जीते।
पियूष पांडे को सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली उनके मशहूर राजनीतिक नारे “अबकी बार मोदी सरकार” से, जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन इससे पहले भी उन्होंने कई यादगार विज्ञापन बनाए जैसे – Fevicol का “जुड़ता है तो Fevicol है”, Cadbury Dairy Milk का “क्योंकि कुछ मीठा हो जाए” और Asian Paints का “हर घर कुछ कहता है”। उनके बनाए विज्ञापनों में भारतीय संस्कृति, भावनाओं और ह्यूमर का सुंदर मेल देखने को मिलता था।
राजस्थान के रहने वाले पियूष पांडे ने अपने करियर की शुरुआत एक बैंकर के रूप में की थी, लेकिन रचनात्मकता की खोज उन्हें विज्ञापन की दुनिया में ले आई। उनकी लेखनी ने आम लोगों की भावनाओं को सीधे छूने की ताकत रखी। विज्ञापन को उन्होंने सिर्फ बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का जरिया बनाया।
उन्हें उनके योगदान के लिए Padma Shri सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी मौत से भारतीय विज्ञापन उद्योग में एक बड़ा खालीपन आ गया है, जिसे भरना मुश्किल होगा। पियूष पांडे ने यह साबित किया कि एक अच्छा विचार न सिर्फ ब्रांड की पहचान बदल सकता है, बल्कि पूरे देश के दिलों में अपनी जगह बना सकता है। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके बनाए शब्द, आवाज़ें और भावनाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।



