अमेरिका इस समय एक के बाद एक प्राकृतिक और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। टेक्सस राज्य में आई भयंकर बाढ़ ने अब तक 120 लोगों की जान ले ली है, जबकि 170 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ का यह संकट राज्य के कई हिस्सों में जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर चुका है। बारिश के लगातार जारी रहने और नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण राहत कार्यों में भारी कठिनाई आ रही है। सड़कों का संपर्क टूट चुका है, बिजली सप्लाई बाधित है, और हजारों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन और FEMA (Federal Emergency Management Agency) की टीमें चौबीसों घंटे राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन खराब मौसम और जलजमाव के चलते ऑपरेशन में बाधाएं आ रही हैं। हेलीकॉप्टर और बोट के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, लेकिन जिन इलाकों में नेटवर्क पूरी तरह ठप है, वहां पर लापता लोगों की खोज चुनौती बन गई है। टेक्सस गवर्नर ने राज्य में आपातकाल की घोषणा कर दी है और संघीय सरकार से विशेष सहायता की मांग की है।
बाढ़ से जूझ रहे अमेरिका को एक और संकट ने जकड़ लिया है — खसरे (Measles) की अचानक बढ़ती घटनाएं। हाल ही में CDC (Centers for Disease Control and Prevention) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में खसरे के मामलों में 300% तक वृद्धि देखी गई है। इसका प्रमुख कारण वैक्सीनेशन दर में गिरावट और संक्रमण की चेन को समय पर ट्रैक न कर पाना है। टेक्सस, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में कई स्कूली बच्चों को खसरे के कारण हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वास्थ्य संकट का सामना करना तब और कठिन हो जाता है जब देश पहले से ही प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हो। बाढ़ प्रभावित इलाकों में साफ पानी और स्वच्छता की भारी कमी है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। UNICEF और WHO जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस हालात पर नज़र रखे हुए हैं और उन्होंने अमेरिका को स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने की पेशकश की है।
इन दोनों आपदाओं ने अमेरिका की आपदा प्रबंधन क्षमता और स्वास्थ्य व्यवस्था को कड़ी परीक्षा में डाल दिया है। जहां एक ओर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना और पुनर्वास करना जरूरी हो गया है, वहीं दूसरी ओर तेजी से फैल रही बीमारी को रोकना एक जनस्वास्थ्य आपातकाल जैसा रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह इन दोनों संकटों को एक साथ कैसे नियंत्रित करती है।



