डोनाल्ड ट्रंप, जो 2024 अमेरिकी चुनावों के बाद एक बार फिर सुर्खियों में हैं, ने अब कनाडा पर सीधा आर्थिक वार करते हुए वहां से आने वाले आयात पर 35% तक का आयात शुल्क (Tariff) लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने इस कठोर निर्णय के पीछे जो कारण बताया है, वह है — फेंटानिल की अवैध सप्लाई, जो अमेरिका में एक गहरी स्वास्थ्य आपदा और नशा संकट का कारण बन चुकी है। उनका दावा है कि कनाडा के रास्ते होकर फेंटानिल जैसे घातक ड्रग्स अमेरिका में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे हजारों अमेरिकी हर साल अपनी जान गंवा रहे हैं।
इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में और खटास आ सकती है। ट्रंप का कहना है कि कनाडा ने फेंटानिल की तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, और अगर ऐसा ही चलता रहा तो अमेरिका को अपनी जनता की सुरक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे। यही कारण है कि उन्होंने कनाडा से आयातित सामान — जैसे वाहन, स्टील, लकड़ी और अन्य उत्पादों — पर भारी शुल्क लगाने का एलान कर दिया।
इस कदम का सीधा असर द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ेगा। कनाडा अमेरिका का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, और दोनों देशों के बीच हर साल अरबों डॉलर का व्यापार होता है। लेकिन अब, ट्रंप की टैरिफ नीति से ना सिर्फ कनाडा की कंपनियों को झटका लगेगा, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी इन उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ट्रंप की ये नीति उनकी पुरानी “अमेरिका फर्स्ट” रणनीति का ही विस्तार है, जिसमें वह अमेरिका के हितों को सर्वोपरि मानते हुए बाहरी देशों पर दबाव बनाते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ एक आर्थिक हथियार नहीं है, बल्कि राजनीतिक दबाव की रणनीति भी है, जिससे वे आने वाले चुनावों में ड्रग्स संकट पर अपनी कड़ी छवि प्रस्तुत कर सकें।
कनाडा ने इस फैसले को अनुचित और एकतरफा करार देते हुए इसका विरोध किया है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। उधर, अमेरिकी उद्योग जगत में भी चिंता की लहर है क्योंकि इन टैरिफ का सीधा असर इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन पर पड़ेगा।
फिलहाल यह देखना होगा कि क्या ट्रंप का यह टैरिफ बम कनाडा को दबाव में लाने में सफल होता है, या यह अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही भारी पड़ेगा। लेकिन इतना तय है कि ट्रंप की यह चाल न केवल व्यापारिक समीकरण बदलने वाली है, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव को भी एक नया मोड़ दे सकती है।



