Mount Rainier, जो अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य में स्थित है और जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक सक्रिय ज्वालामुखियों में गिना जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में इस क्षेत्र में सैकड़ों छोटे-बड़े भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिससे वैज्ञानिकों और आपदा विशेषज्ञों के बीच गंभीर चिंता का माहौल बन गया है। ये भूकंप सामान्य नहीं माने जा रहे क्योंकि इनकी तीव्रता भले ही कम हो, लेकिन संख्या और स्थान ज्वालामुखी के मैग्मा चैंबर के आसपास केंद्रित हैं, जो संभावित विस्फोट के संकेत हो सकते हैं।
Mount Rainier पहले भी कई बार विनाशकारी लहार (बर्फ और लावा का मिश्रण) और विस्फोटों का गवाह रह चुका है, लेकिन इस बार जो हलचल देखी जा रही है, वह विशेष रूप से वैज्ञानिकों को चिंतित कर रही है। USGS (United States Geological Survey) की रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ हफ्तों में 400 से अधिक झटके रिकॉर्ड किए गए हैं, जिनमें से कुछ की गहराई बेहद सतह के करीब थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ज्वालामुखी के जागने की प्रारंभिक चेतावनी हो सकती है।
अगर Mount Rainier फटता है, तो इसके प्रभाव सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक हो सकते हैं। इसकी चोटी पर मौजूद बर्फ और ग्लेशियर जब गर्म मैग्मा के संपर्क में आते हैं, तो वे भयंकर जलप्रलय और लहरों (lahars) में तब्दील हो जाते हैं, जो आसपास के कस्बों और शहरों को कुछ ही घंटों में तबाह कर सकते हैं। इसके प्रभाव से न केवल हजारों लोगों की जान को खतरा होगा, बल्कि हवा, पानी और वातावरण पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में यदि भूकंपों की तीव्रता या आवृत्ति और बढ़ती है, तो इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को एक्टिव किया जा सकता है। फिलहाल आसपास के लोगों को सतर्क रहने और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ज्वालामुखी फटा तो यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक हो सकती है।
इस प्रकार, Mount Rainier के नीचे की उठती हलचलें केवल भूगर्भीय क्रियाएं नहीं हैं, बल्कि वे संभावित विनाश का पूर्वाभास हो सकती हैं। आने वाले दिनों में वैज्ञानिकों की निगरानी, आपदा प्रबंधन और आम लोगों की सजगता ही इस संभावित त्रासदी से निपटने का मार्ग तैयार कर सकती है। सवाल यह नहीं है कि यह फटेगा या नहीं — सवाल यह है कि क्या हम तैयार हैं?



