अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैक्स लगाने की योजना बना रहा है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ेगा जो रूस से कच्चा तेल आयात करते हैं, जिनमें भारत प्रमुख है। भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी की हैं, लेकिन अगर यह टैक्स लागू होता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यह कदम अमेरिका द्वारा रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन यह भारत जैसे विकासशील देशों के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में रूस और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा। इससे भारत को अपने ऊर्जा खर्च में राहत मिली और महंगाई पर काबू पाने में भी मदद मिली। भारत की लगभग 40% तेल जरूरतें अब रूस से पूरी की जा रही हैं।
अगर अमेरिका वास्तव में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैक्स लगाता है, तो भारत जैसे देशों के लिए यह बहुत बड़ी समस्या बन सकती है। इससे न केवल तेल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि आयात लागत में जबरदस्त इज़ाफ़ा होगा, जो महंगाई को बढ़ावा देगा और अर्थव्यवस्था पर बोझ डालेगा।
भारत को एक ओर ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदारों से रिश्ते भी संभालने हैं। अमेरिका पहले भी भारत को रूस से खरीद पर चेतावनी देता रहा है, लेकिन अब यह चेतावनी एक आर्थिक हथियार का रूप लेती दिख रही है। ऐसे में भारत को अपनी विदेश नीति को बेहद संतुलन के साथ आगे बढ़ाना होगा।
यदि अमेरिका यह टैक्स लागू करता है, तो इससे न केवल भारत बल्कि चीन, तुर्किये, ब्राज़ील जैसे अन्य देशों को भी झटका लग सकता है। इससे वैश्विक तेल बाज़ार अस्थिर हो सकता है और ऊर्जा की कीमतों में और उछाल आ सकता है। विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएँ इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।



